जयपुर। राजस्थान में रसोई गैस उपभोक्ताओं को अधिक सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक ईंधन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार बड़े स्तर पर कदम उठा रही है। प्रदेश में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (DPNG) नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्यभर में चिन्हित किए गए कुल 132 गैस जोनों में पाइपलाइन बिछाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक शहरी और अर्ध-शहरी घरों तक सीधे गैस कनेक्शन पहुंचाना है, जिससे आम जनता को पारंपरिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर की निर्भरता और उसकी लंबी कतारों से पूरी तरह परमानेंट राहत मिल सके। यदि आपके भी इलाके की मुख्य सड़कों या गलियों में पीले रंग की गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है या घरों के बाहर गैस मीटर लगाए जा रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि आपके क्षेत्र में जल्द ही यह आधुनिक सेवा शुरू होने वाली है। ऐसे में उपभोक्ता अपने शहर की अधिकृत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनी के माध्यम से नए कनेक्शन के लिए तुरंत आवेदन कर सकते हैं।
एलपीजी के मुकाबले क्यों पहली पसंद बन रही है DPNG?
हर महीने एलपीजी सिलेंडर के बदलते दाम आम परिवारों के मासिक बजट को बिगाड़ देते हैं। ऐसे में डीपीएनजी एक बेहद किफायती और स्थिर विकल्प के रूप में उभर रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके दाम अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं और एलपीजी की तरह इसमें बार-बार कीमतों का भारी उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलता।
इसके अलावा, डीपीएनजी में उपभोक्ताओं को बिजली और पानी के बिल की तरह ही आधुनिक ‘मीटर आधारित’ सुविधा मिलती है। इसका सीधा मतलब यह है कि महीनेभर में जितनी गैस का वास्तविक उपयोग रसोई में होगा, बिल भी केवल उतने ही यूनिट का आएगा। इससे उपभोक्ताओं को एडवांस भुगतान या पूरे सिलेंडर के पैसे एक साथ ब्लॉक करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के खर्च पर बेहतर नियंत्रण बना रहता है।
24 घंटे बिना रुकावट सप्लाई और बुकिंग के झंझट से मुक्ति
डीपीएनजी कनेक्शन लेने के बाद गृहिणियों को खाना बनाते समय अचानक सिलेंडर खत्म होने की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। उपभोक्ताओं को न तो हर महीने रिफिल बुक कराने के लिए परेशान होना पड़ता है और न ही गैस वेंडर या डिलीवरी बॉय का इंतजार करना पड़ता है। पाइपलाइन के जरिए घर तक 24 घंटे लगातार गैस सप्लाई उपलब्ध रहती है, जिससे रसोई का काम बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलता रहता है।
सुरक्षा के लिहाज से सबसे अचूक विकल्प
तकनीकी और सुरक्षा के मानदंडों पर नेचुरल गैस (प्राकृतिक गैस) को एलपीजी की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गैस हवा से हल्की होती है, जिसके कारण किसी संभावित लीकेज या रिसाव की स्थिति में यह बंद जगह पर नीचे जमा होने के बजाय तेजी से ऊपर की ओर वातावरण में फैल जाती है। इससे घर के भीतर गैस जमा होने और किसी बड़े अग्निकांड या मूसलाधार हादसे की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसके साथ ही, घरों में इसकी सप्लाई बेहद नियंत्रित और सुरक्षित दबाव (लो प्रेशर) पर की जाती है।
स्पेस की बचत और पूरी पारदर्शिता
रसोई में डीपीएनजी कनेक्शन लग जाने के बाद भारी-भरकम और बड़े गैस सिलेंडर रखने की आवश्यकता पूरी तरह खत्म हो जाती है। इससे किचन के भीतर अतिरिक्त जगह (स्पेस) उपलब्ध होती है और रसोईघर अधिक व्यवस्थित, आधुनिक और सुंदर दिखाई देता है। वहीं डिजिटल मीटर आधारित व्यवस्था होने के कारण गैस की मात्रा को लेकर किसी भी प्रकार की मिलावट, चोरी या कम गैस मिलने की शिकायत की गुंजाइश भी पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
चूंकि सरकार और विभिन्न गैस वितरण कंपनियां देश के साथ-साथ राजस्थान के कोने-कोने में इस नेटवर्क को फैला रही हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही समय में एलपीजी सिलेंडर गुजरे जमाने की बात हो जाएंगे और घरों में पूरी तरह सुगम, सुरक्षित और बजट-अनुकूल डीपीएनजी का ही राज होगा।