राजस्थान में NEET UG-2026 काउंसलिंग को लेकर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल ने बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। शनिवार को राज्य के सभी राजकीय एवं निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के नोडल अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए गोयल ने साफ किया कि काउंसलिंग प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस वर्ष काउंसलिंग को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और ‘विद्यार्थी-केंद्रित’ बनाने के लिए कई बड़े बदलाव और नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनका पालन करना सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।
कॉलेजों को सख्त निर्देश: देरी हुई तो सीट होगी निरस्त
आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि सभी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में एक नोडल अधिकारी के साथ दो अलग-अलग वेरिफाइंग अधिकारी (एक ऑनलाइन और एक फिजिकल दस्तावेज सत्यापन के लिए) नियुक्त करना अनिवार्य है। ऑनलाइन सत्यापन तय समय-सीमा में पूरा करना होगा। यदि इसमें विलंब हुआ तो संबंधित सीट स्वतः निरस्त हो सकती है। प्रवेश शुल्क की जानकारी भी पोर्टल पर तुरंत अपडेट करनी होगी।
छात्रों को मिलेंगी ये नई और बड़ी सुविधाएं:
- ‘फ्रीज’ और ‘फ्लोट’ का विकल्प: ‘फ्रीज’ (Freeze) का विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को आवंटित कॉलेज में जाकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन और प्रवेश शुल्क जमा कराना होगा। वहीं, ‘फ्लोट’ (Float) विकल्प चुनने वाले छात्रों को अगले चरण में सीट अपग्रेडेशन के लिए 100% ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन की सुविधा मिलेगी। ऐसे छात्रों को तीसरे चरण या अंतिम आवंटन तक कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं होगी।
- सीट ब्लॉकिंग पर लगेगी लगाम: राज्य राउंड-2 के बाद प्रवेश प्राप्त अभ्यर्थियों की सत्यापित सूची तुरंत अपलोड की जाएगी। इससे विभिन्न राज्यों और ऑल इंडिया कोटा में होने वाली ‘सीट ब्लॉकिंग’ की समस्या समाप्त हो जाएगी और रिक्त सीटें फिर से काउंसलिंग पूल में आ सकेंगी, जिससे ज्यादा मेरिट वाले छात्रों को फायदा मिलेगा।
- अवकाश में भी खुली रहेंगी सेवाएं: काउंसलिंग के दौरान कॉलेज रिपोर्टिंग कार्यालय और हेल्पलाइन सेवाएं (स्टेट हेल्पडेस्क, कॉल सेंटर) अवकाश के दिनों में भी निर्बाध रूप से चालू रहेंगी।
NRI और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष नियम
एनआरआई श्रेणी के छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट और एमसीसी (MCC) के दिशा-निर्देशों के तहत ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन लागू किया गया है। इसमें स्पॉन्सर (प्रायोजक) के वैध अभिभावक होने का प्रमाण-पत्र पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। वहीं, दिव्यांग छात्रों का मूल्यांकन NMC के नए मानकों के अनुसार होगा, जिसके लिए स्थायी यूडीआईडी (UDID) नंबर कार्ड होना जरूरी है।
अधिकारियों ने सभी NEET योग्य अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे एमसीसी और राज्य काउंसलिंग पोर्टल पर नजर बनाए रखें और सूचना पुस्तिका का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें।