हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष: ‘दुनिया में कहीं अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, इतिहास स्वयं बताता है कि विजय किसकी हुई’ – डॉ. मोहन भागवत

उदयपुर: भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर चले संघर्ष, प्रतिरोध और आत्मगौरव का इतिहास है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कही। वे बुधवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उदयपुर के गांधी ग्राउंड में प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वावधान में आयोजित ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ को संबोधित कर रहे थे।

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‘अकबर की नहीं, महाराणा प्रताप की जयंती मनती है’

डॉ. भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं का युद्ध नहीं था, बल्कि राष्ट्रचेतना और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संपूर्ण समाज द्वारा लड़ा गया महासंग्राम था। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि मुगल इतिहासकारों के वर्णनों से भी स्पष्ट है कि युद्ध में मुगल सेना को दूर तक पीछे हटना पड़ा था।

उन्होंने कहा, “दुनिया में कहीं अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप का स्मरण आज भी जन-जन करता है। इतिहास का यह लोकनिर्णय स्वयं बताता है कि विजय किसकी हुई थी।” सरसंघचालक ने कहा कि प्रताप को ‘हिंदुआ सूरज’ यूं ही नहीं कहा गया। उनका जीवन सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि लोककल्याण और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए था। उन्होंने समाज का आह्वान किया कि स्वाभिमान और ‘स्व’ का भाव जीवित रहने तक भारत हर चुनौती का सामना कर विजय की नई गाथाएं रचेगा।

शौर्य और भक्ति का संगम है मेवाड़: श्रीजी श्याम शरण

समारोह के विशिष्ट अतिथि निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य ने कहा कि मेवाड़ की भूमि ने प्रताप जैसे राष्ट्रनायक और मीराबाई जैसी महान कृष्णभक्त दोनों को जन्म दिया है। प्रताप ने “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के आदर्श को आत्मसात कर सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती है। इस दौरान जनसमूह ने “चंदन है इस देश की माटी” गीत का सामूहिक गान भी किया।

हल्दीघाटी विजय का सत्य जन-जन तक पहुंचाएं: डॉ. भगवती प्रकाश

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हल्दीघाटी युद्ध के वास्तविक इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जाए। ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि महाराणा प्रताप ने मुगल सेना को परास्त कर स्वाधीनता की रक्षा की थी।

आरंभ में प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि केंद्र में श्रव्य-दृश्य प्रदर्शनी के जरिए प्रताप की हार के विमर्श को तोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र का शिलान्यास डॉ. भागवत के सरकार्यवाह रहते हुआ था और उद्घाटन 2016 में हुआ।

कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां और विशेष व्यवस्थाएं:

  • सीएम और दिग्गजों का जमावड़ा: सभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, भागीरथ चौधरी, डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन सिंह राठौड़, सांसद सीपी जोशी, डॉ. मन्नालाल रावत, सतीश पूनिया और ओंकार सिंह लखावत उपस्थित रहे।
  • मेवाड़ राजपरिवार की उपस्थिति: विशेष रूप से नाथद्वारा विधायक व मेवाड़ राजपरिवार के महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ (जिनका बुधवार को जन्मदिन भी था), सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और निवृत्ति कुमारी मेवाड़ उपस्थित थीं। संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु भी मौजूद रहे।
  • हल्दीघाटी की माटी से तिलक: प्रवेश द्वारों पर सभी आगंतुकों का स्वागत हल्दीघाटी की पावन माटी से तिलक लगाकर किया गया।
  • देशभक्ति गीतों की गूंज: जाने-माने गायक प्रकाश माली ने महाराणा प्रताप और देशभक्ति गीतों से उत्साह भर दिया। विशेष भाव गीत ‘देश उठेगा अपने पैरों निज गौरव के भान से’ की प्रस्तुति विशाल पंडित, भगवत सिंह सोलंकी और उनकी टीम द्वारा दी गई।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त आयोजन: पूरा आयोजन इको-फ्रेंडली रहा। अतिथियों के लिए मिट्टी की पानी की बोतलें और मिट्टी के कूड़ेदान उपयोग में लिए गए।
  • प्रताप गौरव केंद्र के शुल्क में छूट: हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु: शती समारोह के तहत अगले 4 दिन (20 जून तक) प्रताप गौरव केंद्र के दर्शन का शुल्क घटाकर मात्र 50 रुपये कर दिया गया है।
  • चिकित्सा एवं जल व्यवस्था: गर्मी से बचाव के लिए पंखे और मिस्ट लगाए गए थे। ब्लॉकवार जल व्यवस्था के साथ बाहर से आए लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था थी। एमबी हॉस्पिटल के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की विशेष इमरजेंसी टीमें (महिला चिकित्सकों सहित) और एंबुलेंस तैनात रहीं।
  • पार्किंग एवं यातायात: फतह स्कूल और विद्या भवन देवाली में वाहनों की पार्किंग रखी गई, जहां से आगंतुकों को सभा स्थल तक अन्य वाहनों से लाया गया। सारी व्यवस्थाओं में 30 से अधिक संगठनों ने योगदान दिया।
  • तीन दिवसीय प्रदर्शनी का समापन: 15 जून से चल रही ‘हल्दीघाटी युद्ध विजय चित्र प्रदर्शनी’ का समापन हुआ। इसमें हल्दीघाटी की मिट्टी से महेन्द्र कलार्थी द्वारा बनाई गई महाराणा प्रताप व डॉ. मोहन भागवत की तस्वीर के साथ लोगों ने खूब सेल्फी लीं। मंच के सामने बनी कुंभलगढ़ और विजय स्तंभ की प्रतिकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

सभा का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक लाख से अधिक लोगों ने देखा। यह ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का एक विराट उद्घोष बन गई।

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