सलूम्बर में ‘रहस्यमयी’ मौत का तांडव: 6 दिन में 5 मासूमों ने तोड़ा दम, CM भजनलाल के आदेश पर ‘वॉर-फुटिंग’ पर उतरी मेडिकल टीम!

Desk

राजस्थान के नवगठित जिले सलूम्बर के घाटा और लालपुरा गाँवों में पिछले एक सप्ताह से मातम पसरा हुआ है। यहाँ एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी ने बच्चों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिसके चलते अब तक 5 मासूमों की जान जा चुकी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच और बीमारी की रोकथाम के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है और उदयपुर आरएनटी मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम को तत्काल प्रभावित गाँवों के लिए रवाना किया गया है।

मासूमों का विवरण और बीमारी के लक्षण

मृत्यु का शिकार हुए बच्चों में लालपुरा निवासी दीपक (5), सीमा (3), लक्ष्मण (7) और घाटा निवासी राहुल (4) व काजल शामिल हैं। परिजनों के अनुसार, बच्चों को शुरुआत में केवल हल्का बुखार और शरीर में कमजोरी महसूस हुई थी। उन्हें स्थानीय अस्पतालों के बाद उदयपुर के एमबी अस्पताल में भी भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में बच्चों ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में अचानक ‘बॉडी कोलैप्स’ (शरीर टूटना) और अत्यधिक कमजोरी के लक्षण देखे जा रहे हैं, जो किसी गंभीर संक्रमण की ओर इशारा करते हैं।


स्वास्थ्य विभाग की ‘इमरजेंसी’ कार्यवाही: एक नजर में

कदम (Action)विवरणजिम्मेदारी
विशेषज्ञ टीमउदयपुर RNT मेडिकल कॉलेज से सीनियर डॉक्टर्स रवानाराज्य सरकार
निगरानीमुख्य सचिव वी श्रीनिवास द्वारा 24 घंटे मॉनिटरिंग के आदेशजिला प्रशासन
ग्राउंड जीरो एक्शनसलूम्बर CMHO टीम द्वारा गाँव में डेरा, घर-घर स्क्रीनिंगस्वास्थ्य विभाग
निवारक उपायएंटी-लार्वा गतिविधियां, फॉगिंग और सोर्स रिडक्शनस्थानीय प्रशासन
सैंपलिंगसंदिग्ध बच्चों के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गएपैथोलॉजी विभाग

परिजनों का आक्रोश और सिस्टम पर सवाल

इस संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। एक मृतक मासूम के पिता ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए अपने अन्य बच्चों के सैंपल देने से इनकार कर दिया। परिजनों का तर्क है कि उन्होंने धरियावद, सलूम्बर और उदयपुर के बड़े अस्पतालों में बच्चों की कई बार जांच कराई, लेकिन हर बार रिपोर्ट में ‘कुछ नहीं’ निकला और उनके बच्चे की जान चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके कारण मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया।

प्रशासन की अपील और बचाव के उपाय

एसडीएम दिनेश आचार्य और बीसीएमएचओ डॉ. सिंटु कुमावत गाँवों में ही मौजूद हैं और लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और बच्चों को बुखार होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल ले जाएं। विशेषज्ञों ने फिलहाल एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीने, मच्छरों से बचाव के लिए जाली लगाने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह कोई नया वायरस है, बैक्टीरियल इंफेक्शन या फिर जलजनित संक्रमण।

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