महंगी गाड़ियों के फर्जी एक्सीडेंट प्रमाण पत्र बनाकर बीमा कंपनियों को चूना लगाने के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसी ने 48 वाहनों पर लगभग 1.23 करोड़ रुपये का फर्जी क्लेम उठाने के मामले में 17 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।
ऐसे होता था फर्जीवाड़े का खेल
जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क साल 2019 से 2022 के बीच सक्रिय था। इसमें बीमा कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी, सर्वेयर और विभिन्न वर्कशॉप के कर्मियों की मिलीभगत थी। गिरोह ने कई लग्जरी वाहनों का एक ही साल में दो से तीन बार एक्सीडेंट होना दिखाकर क्लेम वसूल किया। कुछ गाड़ियों को तो सर्विस के दौरान ही निशाना बनाकर उनके नाम पर फर्जी क्लेम उठा लिया गया।
मालिकों को भनक तक नहीं, डमी खातों में जाता था पैसा
इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वास्तविक वाहन मालिकों को इस धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगती थी। गिरोह क्षतिग्रस्त गाड़ियों की तस्वीरों को चतुराई से अपलोड करता था और कागजों में मालिक का नाम बदलकर डमी बैंक खातों में क्लेम की राशि ट्रांसफर कर दी जाती थी। यहाँ तक कि मोबाइल पर आने वाले ओटीपी (OTP) भी फर्जी खातों तक ही पहुँचते थे।
सीबीआई की ताबड़तोड़ छापेमारी
सीबीआई को सूचना मिलने के बाद सीकर, चूरू, झुंझुनूं, सुजानगढ़ और नागौर में संयुक्त अभियान चलाया गया। एक सितंबर 2025 को न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा गया। अब तक की जांच में सामने आया है कि कुल 87 वाहनों पर करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये तक का क्लेम उठाया गया है।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला
सीबीआई ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों, सर्वेयरों और वर्कशॉप से जुड़े कर्मचारियों सहित कुल 17 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
संपादकीय टिप्पणी: “यह घोटाला दर्शाता है कि कैसे डिजिटल प्रक्रिया और विभागीय मिलीभगत का उपयोग करके सार्वजनिक धन की चोरी की जा रही थी। सीबीआई की यह जांच कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकती है।”