आरटीओ प्रथम का कारनामा: हाई कोर्ट की रोक के बाद भी 300 कारों से वसूले 7 करोड़, टैक्स की राशि को ‘जुर्माना’ दिखाकर खेल

Desk

राजधानी जयपुर के आरटीओ (RTO) प्रथम कार्यालय में वित्तीय वर्ष के अंत में राजस्व लक्ष्य (Revenue Target) पूरा करने के दबाव में एक बड़ा खेल खेला गया। आरटीओ के उड़न दस्तों ने अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों को निशाना बनाते हुए उनसे ‘वन टाइम टैक्स’ (OTT) की वसूली की, जबकि राजस्थान हाई कोर्ट ने जुलाई 2025 में ही इस पर रोक लगा दी थी।

टैक्स को जुर्माना दिखाने की ‘चालाकी’

पड़ताल में सामने आया है कि विभाग ने पकड़ी गई करीब 300 कारों से 7 करोड़ रुपये वसूले। कोर्ट की रोक के कारण इस राशि को सीधे ‘टैक्स’ मद में नहीं लिया जा सकता था, इसलिए अधिकारियों ने इसे ‘जुर्माना’ (कंपाउंडिंग) के रूप में रसीद पर दर्शा दिया। इसका नुकसान यह है कि यदि ये वाहन मालिक भविष्य में राजस्थान में पंजीकरण कराना चाहें, तो जुर्माने की यह राशि टैक्स में समायोजित (Adjust) नहीं होगी और उन्हें दोबारा टैक्स भरना पड़ेगा।


इन 4 केसों से समझें वसूली का ‘चमत्कार’

विभाग ने किस तरह मामूली चालान पर लाखों रुपये की वसूली की, इसे इन उदाहरणों से समझा जा सकता है:

केस नं.वाहन नंबर एवं राज्यवास्तविक चालान राशिवसूली गई राशि (जुर्माना)
केस 1MP17-CC-5428 (मध्य प्रदेश)मात्र ₹10,000₹1.36 लाख
केस 2CH01-BE-6628 (चंडीगढ़)मात्र ₹1,500₹3.17 लाख
केस 3GJ01-WH-6828 (गुजरात)मात्र ₹600₹2.50 लाख
केस 4HR20-BA-5698 (हरियाणा)मात्र ₹25,100₹1.19 लाख

हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना

राजस्थान हाई कोर्ट ने जुलाई 2025 में स्पष्ट आदेश दिया था कि अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों से तब तक वन टाइम टैक्स नहीं वसूला जा सकता जब तक सरकार इसके लिए नई अधिसूचना (Notification) जारी नहीं करती। वर्तमान में ऐसी कोई अधिसूचना अस्तित्व में नहीं है, फिर भी उड़न दस्तों ने विशेषकर फरवरी और मार्च के महीनों में अंधाधुंध कार्रवाई की।

अधिकारियों के विरोधाभासी बयान

“जिन कार मालिकों से ओटीटी की राशि जुर्माने में ली गई है, उन्हें वेरिफिकेशन दिया जा रहा है। यदि वे आने वाले दिनों में राजस्थान में पंजीयन कराते हैं, तो इस राशि को समायोजित किया जाएगा।”

नाथू सिंह, डीटीओ (प्रवर्तन), आरटीओ प्रथम

“हाई कोर्ट ने व्यक्ति विशेष मामले में टैक्स वसूली पर रोक लगाई है। जिन्हें पंजीयन कराना था उनकी राशि ओटीटी में ली और जिन्हें नहीं कराना था उनसे जुर्माना लिया गया। यह राशि विशेष परिस्थिति में ही ली गई है।”

राजेंद्र शेखावत, आरटीओ प्रथम

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