महात्मा गांधी स्कूलों में बदले नियम, हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए खुला प्रवेश

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टोंक। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में अब हिंदी माध्यम से भी प्रवेश देने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद टोंक जिले सहित पूरे प्रदेश के कई महात्मा गांधी स्कूलों में हिंदी माध्यम की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय उन अभिभावकों की मांग को देखते हुए लिया गया है, जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में हिंदी माध्यम से पढ़ाना चाहते थे।

अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम भी रहेगा

अब तक महात्मा गांधी स्कूलों को मुख्य रूप से अंग्रेजी माध्यम के लिए जाना जाता था, लेकिन नए आदेश के बाद इन स्कूलों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी माध्यम की कक्षाएं भी संचालित होंगी। इससे विद्यार्थियों को अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार माध्यम चुनने का अवसर मिलेगा।

अभिभावकों को मिलेगा विकल्प

शिक्षा विभाग के अनुसार कई क्षेत्रों से लगातार मांग उठ रही थी कि सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी माध्यम की व्यवस्था भी की जाए, ताकि ग्रामीण और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को स्कूल बदलने की आवश्यकता न पड़े। नए निर्णय से ऐसे परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

टोंक जिले में शुरू हुई तैयारी

टोंक जिले के संबंधित विद्यालयों में हिंदी माध्यम की कक्षाएं शुरू करने की प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। स्कूल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था, कक्षा संचालन और प्रवेश प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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विद्यार्थियों पर क्या होगा असर?

  • हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को बेहतर सरकारी विद्यालयों में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
  • अंग्रेजी और हिंदी दोनों माध्यम एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को स्कूल बदलने की जरूरत कम होगी।
  • अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।
  • शिक्षा विभाग को छात्र संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार का उद्देश्य

राज्य सरकार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाना और अभिभावकों को उनकी पसंद के अनुसार माध्यम चुनने की सुविधा देना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ेगा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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