OBC आयोग की रिपोर्ट में अनदेखी से धाकड़ समाज में रोष, 15 लाख वोटर्स का हवाला देकर की पुनः सत्यापन की मांग

राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आने वाली जातियों के आंकड़ों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ‘अखिल भारतीय श्री धाकड़ महासभा भारत वर्ष’ ने राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission Rajasthan) पर धाकड़ समाज (Dhakad Samaj) की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलसीराम धाकड़ के नेतृत्व में 18 अगस्त 2026 को कोटा में जिलाधीश (कलेक्टर) को एक ज्ञापन सौंपा गया, जो OBC आयोग के माननीय अध्यक्ष को संबोधित है।

अखिल भारतीय धाकड़ महासभा ने OBC आयोग को लिखा पत्र

क्या है पूरा विवाद?

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि हाल ही में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रिंट मीडिया के माध्यम से OBC वर्ग में सम्मिलित विभिन्न जातियों के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई थी। महासभा की चिंता का मुख्य कारण यह है कि आयोग द्वारा जारी की गई इस जानकारी में धाकड़ समाज का कहीं कोई उल्लेख नहीं किया गया है। संगठन ने इसे “अत्यंत चिंताजनक एवं विचारणीय विषय” करार दिया है।

‘राजस्थान में हैं 15 लाख धाकड़ मतदाता’

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राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलसीराम धाकड़ ने पत्र के माध्यम से आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि धाकड़ समाज राजस्थान के विभिन्न जिलों और क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में निवास करता है। महासभा के सामाजिक आकलन के अनुसार, वर्तमान में राजस्थान के अंदर धाकड़ समाज के लगभग 15 लाख मतदाता मौजूद हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद OBC जनसंख्या, सामाजिक स्थिति या राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी किसी भी रिपोर्ट में उनका तथ्यात्मक उल्लेख न होना समाज के साथ अन्याय है।

महासभा की प्रमुख मांगें:

धाकड़ महासभा ने OBC आयोग से विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • धाकड़ समाज से संबंधित जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और OBC भागीदारी से जुड़े तथ्यों की पुनः समीक्षा और सत्यापन कराया जाए।
  • आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर धाकड़ समाज की वास्तविक स्थिति को आयोग की रिपोर्ट और सार्वजनिक प्रस्तुतियों में उचित स्थान दिया जाए।

महासभा ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी अन्य समाज के अधिकार या प्रतिनिधित्व को कम करना नहीं है, बल्कि सही आंकड़ों और तथ्यात्मक स्थिति के आधार पर प्रत्येक समाज (जिसमें धाकड़ समाज भी शामिल है) का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि आयोग इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा

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