क्या आधुनिकता की अंधी दौड़ में जयपुर अपनी आत्मा, संस्कृति और हरियाली खोता जा रहा है? गुलाबीनगरी की खोई हुई विरासत और पर्यावरण को वापस लौटाने के लिए एक ऐसा ऐतिहासिक महा-अभियान शुरू हो रहा है, जो अगले 10 सालों में शहर की पूरी तस्वीर बदल कर रख देगा। आखिर क्या है 5 लाख परिवारों को एक साथ जोड़ने वाला यह नया प्लान और क्या है ‘मोबाइल फास्टिंग’? आइए उठाते हैं इस सस्पेंस से पर्दा…
‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ से आगाज
जयपुर की संस्कृति को सहेजने के लिए 2 अक्टूबर को जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट से ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ महा-अभियान का शंखनाद होगा। डिप्टी सीएम दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा और महापौर सुनील कोठारी की मौजूदगी में पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की जाएगी। फिक्की फ्लो की अध्यक्ष नीता बूचरा के अनुसार, यह कोई सरकारी योजना नहीं बल्कि घर-घर से शुरू हुई एक मुहिम है, जिससे अब तक 1000 समूह जुड़ चुके हैं।
कचरे से खाद, लोकगीत और ‘मोबाइल फास्टिंग’
पर्यावरणविद अशोक मित्तल के मुताबिक, अगले 3 महीने में 5 लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य है। महिलाओं को घर के गीले कचरे से जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही लुप्त हो रहे पारंपरिक लोकगीतों को फिर से जीवंत किया जाएगा। सबसे अनूठी पहल ‘मोबाइल फास्टिंग’ होगी, जहां लोगों को कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर परिवार को समय देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही प्लास्टिक, नशे और भिक्षावृत्ति के खिलाफ भी बड़ा जनजागरण होगा।
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