जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए शास्त्री नगर थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक (ASI) हरदेवराम को 40,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी एएसआई ने यह घूस एक मारपीट के केस में मदद करने के नाम पर परिवादी से मांगी थी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, एक महिला ने जोधपुर एसीबी कार्यालय में उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसके पति के खिलाफ एक मारपीट का मामला दर्ज है, जिसकी जांच शास्त्री नगर थाने के एएसआई हरदेवराम के पास है। आरोपी जांच अधिकारी हरदेवराम ने इस केस में महिला के पति की मदद करने और मामले से उसका नाम हटाने की एवज में 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। परिवादी महिला ने बताया कि आरोपी एएसआई पहले ही ‘खर्चा-पानी’ के नाम पर 5,000 रुपये ले चुका था, लेकिन इसके बाद भी वह लगातार बाकी रकम के लिए दबाव बना रहा था।
यूं बिछाया गया ट्रैप
महिला की शिकायत मिलने के बाद जोधपुर एसीबी की स्पेशल यूनिट ने मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया। शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई गई। योजना के मुताबिक, परिवादी महिला को रिश्वत की बाकी रकम देने के लिए तैयार किया गया।
घर पहुंचा और जेब में रखे पैसे, तभी ACB ने धर दबोचा पूरी निगरानी रखते हुए एसीबी की टीम ने अपना जाल बिछाया। जैसे ही एएसआई हरदेवराम परिवादी महिला के घर पहुंचा और उससे 40,000 रुपये रिश्वत के रूप में लेकर अपनी जेब में रखे, पहले से मुस्तैद एसीबी टीम ने उसे तुरंत पकड़ लिया। एसीबी अधिकारियों ने मौके पर ही आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर उसकी जेब से रिश्वत की राशि बरामद कर ली।
आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ जारी रिश्वत की राशि बरामद होने के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। एसीबी ने आरोपी एएसआई हरदेवराम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी से कड़ी पूछताछ की जा रही है कि इस घूसकांड में थाने के अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं या क्या इससे जुड़े कोई अन्य लेन-देन पूर्व में हुए हैं।
एसीबी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय तरीके से की गई थी। विभाग का कड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।