राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित प्राध्यापक-हिन्दी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा 2022 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश नाकाम हो गई है। एसओजी (SOG) ने इस फर्जी डिग्री रैकेट के मुख्य आरोपी ध्वजकीर्ति शर्मा (55 वर्ष) को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर 22 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया है।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जीवाड़ा
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) जयपुर, विशाल बंसल ने बताया कि यह मामला तब शुरू हुआ जब अभ्यर्थी कमला कुमारी ने आवेदन के दौरान मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार से जारी एम.ए. (हिन्दी) की डिग्री पेश की थी। आयोग ने जब इन दस्तावेजों का सत्यापन करवाया, तो यूनिवर्सिटी ने इन्हें जारी करने से साफ इनकार कर दिया।
- साजिश की गहराई: जांच में पता चला कि आरोपी ने यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा था।
- नकली मोहरें और हस्ताक्षर: आरोपियों ने न केवल फर्जी अंकतालिकाएं और डिग्री तैयार कीं, बल्कि माइग्रेशन और चरित्र प्रमाण पत्र पर यूनिवर्सिटी अधिकारियों की नकली मुहर और खुद ध्वजकीर्ति शर्मा के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया।
आरोपी की प्रोफाइल: पुराना खिलाड़ी है ध्वजकीर्ति
| विवरण | जानकारी |
| नाम | ध्वजकीर्ति शर्मा (55 वर्ष) |
| निवासी | भीलवाड़ा, राजस्थान |
| मुख्य आरोप | फर्जी डिग्री, अंकतालिका और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करना |
| वर्तमान स्थिति | पुलिस रिमांड पर, गहन पूछताछ जारी |
पुलिस के अनुसार, ध्वजकीर्ति शर्मा कोई नौसिखिया नहीं है; वह पहले भी फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने के मामलों में संलिप्त रह चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक अभ्यर्थी कमला कुमारी सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सिस्टम की सख्ती: फर्जीवाड़े के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
अजमेर के सिविल लाइंस थाने में 20 मार्च 2023 को दर्ज हुए इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि आरपीएससी और राजस्थान पुलिस भर्ती प्रक्रियाओं में किसी भी स्तर की धोखाधड़ी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। एसओजी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितनी भर्तियों में अपनी पैठ बनाई थी और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के कौन-कौन से कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा थे।