“सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर। देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गम्भीर।।”
हालिया लोकसभा-राज्यसभा के धमाकेदार सियासी आर-पार के बाद अब शुरू होने वाला है राजस्थान विधानसभा का विशेष सत्र। गुरुवार से शुरू हो रहा सत्र, छोटा ही सही लेकिन हंगामेदार रहने वाला है। इसीलिए उपर लिखा- देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गम्भीर। बस देखना ये है कि ये घाव किसे लगने वाला है। इतना तो साफ है कि चूंकि प्रदेश निकाय-पंचायत चुनाव के मुहाने पर खड़ा है, ऐसे में कांग्रेस BJP सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी कर चुकी है। वहीं, दूसरी ओर BJP ने अपने मंत्री-विधायकों को हर वार से पार पाने के लिए तैयार रहने को कह दिया है। हालांकि कांग्रेस ने इशारा कर दिया है कि इस बार विपक्ष से पार पाना आसान नहीं होगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पहले ही सरकार पर सत्र को सीमित रखने का आरोप जड़ दिया है। आइए, एक-एक कर जानते हैं, वो कौन से मुद्दे है जो सदन की सियासी गरमी को हवा देंगे।

- GenZ और Gen Alpha के मुद्दे
दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्कूल की बदहाली और उसके खिलाफ आवाज उठाते बच्चों की तस्वीरें लगातार सामने आ रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की स्थिति को कांग्रेस प्रमुख मुद्दा बनाएगी। जूली पिछले साल के झारखंड हादसे को कोट करते हुए पहले ही दावा कर चुके हैं कि प्रदेश में करीब 85 हजार स्कूल कक्ष खराब स्थिति में हैं, 3,768 स्कूल जर्जर घोषित किए जा चुके हैं और शिक्षा विभाग में करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। ऐसे में कई सवाल हैं जिनका सामना सरकार को करना पड़ेगा। साथ ही शिक्षा विभाग का हालिया आदेश (वीडियोग्राफी वाला), तबादला, टीचर्स के मुद्दे और मदन दिलावर के बयान भी कांग्रेस की तरकश के तीर रहेंगे। - बुनियादी ढांचे के साथ बेरोजगारी का मुद्दा
क्षतिग्रस्त सड़कों से लेकर रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान खोजते वीडियो गाहे-बगाहे वायरल हो रहे हैं। ऐसे में रोजगार के अवसर, खराब सड़कें और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी विपक्ष का हथियार बन सकता है। - स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
प्रसुताओं (गर्भवती महिलाओं) की मौत का मामला, दवाओं की स्थिति, अस्पतालों के हाल। ये वो मुद्दे हैं जिन्हें लेकर विपक्ष पहले ही सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर चुका है। ऐसे में सदन में कांग्रेस के प्रमुख चेहरे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी से उतरेंगे।

- माननीयों से जुड़े और नीतिगत मामले
समान नागरिक संहिता यानि UCC भी सत्र में बड़ा मुद्दा बन सकता है। 13 अगस्त को राज्य मंत्रिमंडल ने UCC विधेयक को मंजूरी दी थी। इसे इसी सत्र में पेश किए जाने की तैयारी की खबरें भी थी। लेकिन अब ये विधेयक निकाय चुनावों के बाद संभावित अगले सत्र तक टलता नजर आ रहा है। फिर भी, सियासी समीकरणों के लिहाज से कांग्रेस इसपर भी मोर्चा खोलते दिखाई दे सकती है। इसके अलावा, ‘लखपति दीदी’ पर CM भजनलाल के 20 लाख वाले दावे को भी कांग्रेस सदन में मुद्दा बनाने की तैयारी में है। - अन्य
सत्र हंगामेदार रहेगा, इसमें शायद ही किसी को कोई शक हो। कुछ और मुद्दे हैं जो हंगामे को तड़का लगाते दिख सकते हैं। कानून-व्यवस्था और अपराध का मुद्दा, निकाय-पंचायत चुनावों में आरक्षण का मुद्दा भी गुंज सकता है। साथ ही, अब तक की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर काग्रेस सरकार पर हमलावर होती दिख सकती है। वहीं, याद कीजिए जूली का किरोड़ीलाल मीणा के ACB से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया। अगर ये भी एक इशारा है तो कांग्रेस BJP के कथित अंतर्विरोध और गुटबाजी का मामला भी सदन में राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा सकती है।
