लौटेगा जयपुर का वैभव: 300वीं वर्षगांठ पर पूरे साल होंगे कार्यक्रम, ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ का आगाज

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की 300वीं वर्षगांठ के अवसर पर शहर के वैभव को लौटाने और इसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए पूरे साल विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा और जयपुर के नवनिर्वाचित महापौर सुनील कोठारी ने इसकी संयुक्त रूप से घोषणा की है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य जयपुर की समृद्ध विरासत, कला, पर्यटन और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना तथा शहर को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक हेरिटेज सिटी बनाना है।

लौटेगा जयपुर का वैभव: 300वीं वर्षगांठ पर सालभर होंगे कार्यक्रम, ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ की शुरुआत

‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान की शुरुआत

अभियान के तहत 2 अक्टूबर (शुक्रवार) को जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट से ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ का आगाज हुआ। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा और महापौर सुनील कोठारी ने शहरवासियों को ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ लगाने का संकल्प दिलाया। साथ ही लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ, प्लास्टिक-मुक्त और आधुनिक सुविधाओं से युक्त जयपुर बनाने की शपथ भी दिलाई गई। इस अवसर पर जवाहर सर्किल पर आने वाले आमजन को पौधों का वितरण भी किया गया।

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा, “जयपुर का विकास उसकी मूल विरासत और पहचान को बचाकर ही किया जाएगा। यहां की स्थापत्य कला, पर्यावरण और लोक संस्कृति ही जयपुर की आत्मा है। इन्हें संरक्षित करते हुए ही हम जयपुर को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ेंगे।” सांसद मंजू शर्मा ने शहरवासियों से अपील की कि जयपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से मिली विरासत है, जिसे सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है।

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5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा ‘हरित संगम’ का कारवां

‘आपणो जयपुर हरित संगम’ की अध्यक्ष नीता बूचरा और सचिव अशोक मित्तल ने बताया कि यह 10 साल की एक लंबी सामाजिक यात्रा है। इसका लक्ष्य अगले तीन महीनों में कम से कम 50 हजार घरों को सीधे जोड़ना और जनजागरण के जरिए 5 लाख परिवारों तक पहुंचना है।

लौटेगा जयपुर का वैभव: 300वीं वर्षगांठ पर सालभर होंगे कार्यक्रम, ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ की शुरुआत

इस बड़े अभियान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • घर से शुरू होगी स्वच्छता: घरों से निकलने वाले कचरे की मात्रा को कम करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। महिलाओं को गीले कचरे से घर पर ही जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि कचरा गाड़ियों पर निर्भरता कम हो सके।
  • हर घर में 3 पौधे: शहर के हर घर में कम से कम तीन पौधे लगाने और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  • लोकगीतों का संरक्षण: तेजी से लुप्त हो रहे पारंपरिक लोकगीतों (जैसे तीज, गणगौर, होली, नवरात्र के गीत) को महिलाओं की टोलियों के जरिए फिर से सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा।
  • सामाजिक स्थलों का जीर्णोद्धार: मंदिरों, श्मशानों, सामुदायिक केंद्रों, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को समाज के सहयोग व श्रमदान से बेहतर बनाया जाएगा।
  • मोबाइल फास्टिंग: परिवार के साथ संवाद बढ़ाने और मानसिक शांति के लिए अभियान में ‘मोबाइल फास्टिंग’ (कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी) की अनूठी पहल भी की जाएगी।
  • नशा व भिक्षावृत्ति मुक्ति: जयपुर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ-साथ भिक्षावृत्ति और नशे के खिलाफ प्रशासन के सहयोग से व्यापक जनजागरण अभियान चलेगा।

1000 समूह तैयार, बच्चों की भी होगी भागीदारी

नीता बूचरा ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत लोगों के घरों से हुई है। जयपुर में अब तक करीब 1000 ऐसे समूह तैयार हो चुके हैं, जिनमें 15 से 20 घर शामिल हैं। महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों और व्यापारियों की अलग-अलग टोलियां बनाई गई हैं। इस अभियान में स्कूली बच्चों को सबसे आगे (अग्रिम पंक्ति में) रखा जाएगा, ताकि बचपन से ही उनमें पर्यावरण, स्वच्छता और संस्कारों के बीज बोए जा सकें।

कार्यक्रम समरस भारत के सचिव धनंजय सिंह ने कहा कि खेल और योग के जरिए बच्चों व युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास भी इस अभियान का अहम हिस्सा होंगे। अंततः इस पूरे आयोजन का लक्ष्य एक ऐसा नागरिक स्वभाव विकसित करना है, जिसमें शहर के प्रति जिम्मेदारी रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाए।

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