राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की उदयपुर इंटेलिजेंस यूनिट ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। ब्यूरो ने मांडवा थानाधिकारी (SHO) निर्मल कुमार खत्री और बीट कांस्टेबल भल्लाराम पटेल को 8 लाख रुपये की रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी मोहनलाल और उसके भाई कामाराम ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि 20 मार्च 2026 को मांडवा पुलिस ने उनके गांव के पास एनडीपीएस (NDPS) की कार्रवाई की थी। इस दौरान थानाधिकारी निर्मल खत्री और कांस्टेबल भल्लाराम उनके घर पहुंचे और धमकी दी कि वे उन्हें और उनके परिवार को इस केस में झूठा फंसा देंगे। इस कार्रवाई से बचाने के बदले आरोपियों ने प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये के हिसाब से कुल 20 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।
ACB का बिछाया जाल
शिकायत के बाद एसीबी के पुलिस निरीक्षक डॉ. सोनू शेखावत के नेतृत्व में जाल बिछाया गया। सत्यापन के दौरान पाया गया कि आरोपी कांस्टेबल भल्लाराम ने थानाधिकारी के नाम पर 8 लाख रुपये लेना स्वीकार किया। बुधवार को जब कांस्टेबल भल्लाराम परिवादी के घर रिश्वत की पहली किस्त लेने पहुंचा, तो एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया।
वॉट्सऐप कॉल से खुली SHO की पोल
कांस्टेबल की गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने उससे थानाधिकारी निर्मल खत्री को वॉट्सऐप कॉल करवाया। इस बातचीत के दौरान थानाधिकारी द्वारा रिश्वत की राशि के संबंध में सहमति जताने के बाद, टीम ने पुलिस थाना मांडवा पहुंचकर थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री को भी उनके सरकारी क्वार्टर से हिरासत में ले लिया।
डमी नोटों का हुआ इस्तेमाल
हैरानी की बात यह है कि परिवादी ने गरीबी का हवाला देते हुए केवल 1 लाख रुपये की व्यवस्था की थी, जबकि बाकी के 7 लाख रुपये के ‘चिल्ड्रन नोट’ (डमी नोट) रिश्वत की राशि के साथ मिलाए गए थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।