जयपुर: राजस्थान के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बेहद अजब-गजब और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग में तबादला परिवेदनाओं के निस्तारण को लेकर जारी किए गए आदेशों में तारीखों का ऐसा विरोधाभास सामने आया है कि शिक्षकों का माथा चकरा गया है और वे पूरी तरह घनचक्कर हो गए हैं। आदेश में बैक डेट (पिछली तारीख) में ज्वाइनिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके चलते कई प्रभावित शिक्षकों ने अब अदालत (कोर्ट) का रुख किया है।
13 अगस्त को जारी आदेश, 12 अगस्त तक ज्वाइनिंग की शर्त
मामले के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार के डिजिटल हस्ताक्षर से व्याख्याता (हिन्दी) के परिवेदना निस्तारण और स्थानांतरण से जुड़े दो अलग-अलग आदेश 13 अगस्त को जारी किए गए थे:
- पहला आदेश: दोपहर 12:47 बजे जारी हुआ, जिसमें 124 व्याख्याताओं के तबादले किए गए।
- दूसरा आदेश: शाम 4:39 बजे जारी किया गया, जिसमें 38 व्याख्याताओं के तबादले किए गए।
इस प्रकार कुल 162 व्याख्याताओं के तबादले इन आदेशों के जरिए किए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दोनों ही आदेशों के बिंदु संख्या चार में संबंधित कार्मिकों को 12 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षकों का सवाल है कि जो आदेश खुद 13 अगस्त को जारी हुआ हो, उसमें एक दिन पहले यानी 12 अगस्त तक कार्यग्रहण करना आखिर कैसे संभव है? प्रशासनिक अमले की इस बड़ी लापरवाही और तकनीकी गफलत के कारण शिक्षक असमंजस में हैं और विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।