राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर 1950 से 2002 के बीच राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) न फहराए जाने के सवाल पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने इस विवाद पर विराम लगाते हुए दो टूक कहा है कि आरएसएस कभी भी तिरंगे का अपमान नहीं करता है और संघ हमेशा से राष्ट्रध्वज के सम्मान के पक्षधर रहा है।
भगवा ध्वज को ‘गुरु’ मानने की है परंपरा
तिरंगे को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने बताया कि संघ की शाखाओं में एक पुरानी परंपरा के अनुसार ‘भगवा ध्वज’ को गुरु के रूप में स्थापित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परंपरा और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान में कोई विरोधाभास नहीं है; दोनों का अपना-अपना सर्वोच्च स्थान है।
2002 से नियमित फहराया जा रहा है तिरंगा
इतिहास का हवाला देते हुए सरसंघचालक ने बताया कि ऐसा नहीं है कि संघ मुख्यालय पर कभी तिरंगा नहीं फहराया गया। उन्होंने कहा कि नागपुर स्थित RSS मुख्यालय पर देश की आजादी के समय 1947 में और फिर गणतंत्र लागू होने पर 1950 में तिरंगा फहराया गया था। इसके बाद, वर्ष 2002 से हर साल स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के राष्ट्रीय पर्वों पर संघ मुख्यालय पर नियमित रूप से तिरंगा फहराया जा रहा है।
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