जयपुर | राजस्थान के छोटे मकानों, संकरी सड़कों और घनी बस्तियों के बाहर बेतरतीब खड़ी होने वाली गाड़ियों के दिन अब लदने वाले हैं। हरियाणा की तर्ज पर अब राजस्थान में भी ‘सख्त पार्किंग प्लान’ लागू होने जा रहा है। प्रदेश के शहरों को अवैध पार्किंग से मुक्त करने के लिए एक विशेष महा-अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत ‘नो-पार्किंग’ में खड़े वाहनों का सीधा चालान होगा और यदि किसी भवन मालिक ने अपने ‘पार्किंग स्थल’ का इस्तेमाल किसी अन्य काम में किया, तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
6 लाख कारें सड़कों पर, बनेगा नया ‘बायलॉज’
आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पूरे राजस्थान में करीब 22 लाख चार पहिया (Four-wheeler) वाहन हैं। इनमें से 6 लाख वाहन रोजाना सड़कों या घरों के बाहर पार्क होते हैं, जिससे गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है।
- देश का तीसरा राज्य: इस विकराल समस्या से निपटने के लिए सरकार मास्टर प्लान की तय चौड़ाई के रास्ते में आ रही अवैध पार्किंग को हटाएगी। इसके लिए राजस्थान में नया ‘पार्किंग बायलॉज’ बनाया जाएगा। ऐसा सख्त कानून बनाने वाला राजस्थान देश का मात्र तीसरा राज्य होगा।
- सुप्रीम कोर्ट का डंडा: दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की पालना में देश के सभी शहरों को अपना-अपना पार्किंग प्लान बनाकर उसे लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है।
कलेक्टर, SP और निकाय का ‘जॉइंट एक्शन प्लान’
शहरों को पार्किंग फ्री बनाने का जिम्मा कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और स्थानीय निकायों की त्रिकोणीय संयुक्त टीम के पास होगा:
- निकाय की जिम्मेदारी: स्थानीय निकाय अवैध पार्किंग स्थलों का चिह्नीकरण करेंगे और गाड़ियां हटाने के लिए क्रेन व अन्य संसाधन उपलब्ध कराएंगे।
- पुलिस का एक्शन: कलेक्टर के दिशा-निर्देशों पर स्थानीय और ट्रैफिक पुलिस मैदानी स्तर पर चालान व जब्ती की कानूनी कार्रवाई करेगी।
सख्त पार्किंग प्लान के 4 बड़े ‘पिलर’
- 1. पहले चेतावनी, फिर बताएंगे ‘गाड़ी पार्क कहां करें’: प्रशासन आम जनता पर सीधे डंडा नहीं चलाएगा। ‘नो-पार्किंग’ की कार्रवाई से पहले लोगों को चेतावनी दी जाएगी। इसके अलावा निकाय के अफसर बाकायदा यह गाइड करेंगे कि लोग अपने वाहन कहां खड़े करें। निर्धारित पार्किंग स्थलों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलेगा।
- 2. पार्किंग का अन्य उपयोग होते ही दर्ज होगा मुकदमा: शहर के कई कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और घरों में जो जगह ‘पार्किंग’ के लिए तय है, वहां दुकानें, गोदाम या दफ्तर खोल लिए गए हैं। अब ऐसी जमीन का दूसरा उपयोग पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में भवन मालिक पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे। पार्किंग का इस्तेमाल सिर्फ गाड़ियों के लिए ही होगा।
- 3. खाली होंगे फुटपाथ, बनेंगे ‘मॉडल कॉरिडोर’: पैदल चलने वालों के अधिकार सुरक्षित किए जाएंगे। फुटपाथ पर खड़े वाहनों को सख्ती से हटाया जाएगा और मालिकों को नोटिस थमाया जाएगा। राजधानी जयपुर में टोंक रोड पर प्रस्तावित ‘मेट्रो लाइन’ के सहारे एक ‘मॉडल कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा। इसी तर्ज पर राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी सुरक्षित कॉरिडोर बनेंगे।
- 4. हर शहर का होगा अपना ‘कस्टमाइज्ड प्लान’: सभी शहरों पर एक जैसा नियम थोपा नहीं जाएगा। हर शहर के प्रशासन को यह छूट होगी कि वह सिटी प्लानर और ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स की मदद से वहां के जनसंख्या घनत्व, बसावट, भौगोलिक स्थिति और वाहनों की कुल संख्या को देखते हुए अपना कस्टमाइज्ड ‘पार्किंग प्लान’ तैयार करे।