राजस्थान में आयोगों के ‘शीर्ष’ खाली: आरपीएससी अध्यक्ष साहू की विदाई, लोकायुक्त सहित 9 सरकारी संस्थाएं बिना मुखिया के बेपटरी

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अजमेर/जयपुर। राजस्थान की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित भर्ती एजेंसी, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू (यूआर साहू) का कार्यकाल आज, 19 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पिछले वर्ष आरपीएससी की कमान संभालने वाले साहू ने अपने 1 साल के कार्यकाल में कई नवाचार किए और दर्जनों अटकी भर्तियों को पटरी पर लाए।

साहू की विदाई के साथ ही अब आयोग के नए मुखिया की तलाश तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में पुख्ता चर्चा है कि भजनलाल सरकार फिलहाल पूर्णकालिक अध्यक्ष की बजाय किसी वरिष्ठ सदस्य को ‘कार्यवाहक अध्यक्ष’ (Acting Chairman) की जिम्मेदारी सौंपेगी, जिसके बाद सभी राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों को साधते हुए परमानेंट अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।

कार्यवाहक अध्यक्ष की रेस में ये दो नाम सबसे आगे

वर्तमान में आरपीएससी के भीतर कार्यवाहक अध्यक्ष के पद के लिए दो वरिष्ठतम नामों की चर्चा बेहद जोरों पर है:

  1. कैलाश मीणा: आयोग के वरिष्ठ सदस्य।
  2. हेमंत प्रियदर्शी: वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी और आयोग के सदस्य।

प्रशासनिक हलकों का मानना है कि भजनलाल सरकार जिसे भी कार्यवाहक अध्यक्ष बनाएगी, बाद में उसे ही पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भी हरी झंडी दी जा सकती है।

दागदार इतिहास और खाली पदों का गणित

आरपीएससी में पहले अध्यक्ष सहित कुल 8 पद थे (1 अध्यक्ष और 7 सदस्य)। प्रदेश की वर्तमान सरकार ने आते ही सदस्यों के 3 नए पद सृजित किए थे, जिससे कुल संख्या 11 हो गई थी, लेकिन ये तीन पद अब तक खाली ही चल रहे हैं।

पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के समय नियुक्त किए गए दो सदस्य—बाबूलाल कटारा और रामूराम रायका—राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 के पेपर लीक और पेपर बेचने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं। रायका का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जबकि कटारा लंबे समय से जेल में बंद होने के कारण निलंबित (Suspend) चल रहे हैं। यूआर साहू के जाने के बाद अब आयोग में सिर्फ 5 सक्रिय सदस्य (कर्नल केसरी सिंह राठौड़, कैलाश मीणा, हेमंत प्रियदर्शी, प्रोफेसर अयुब खान, सुशील कुमार और अशोक कुमार) ही बचेंगे, जिनके कंधों पर राज्य की बड़ी भर्तियों का जिम्मा होगा।

सिर्फ RPSC ही नहीं, लोकायुक्त और 9 अन्य आयोग भी बिना मुखिया के बेपटरी!

एक तरफ जहां आरपीएससी आज मुखियाविहीन होने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में भ्रष्टाचार और आम जनता की शिकायतों पर सुनवाई करने वाले लगभग सभी प्रमुख संवैधानिक और वैधानिक आयोग इस समय बिना अध्यक्ष के ‘अंग भंग’ पड़े हैं। सरकार ने हाल ही में अपना आधा कार्यकाल पूरा किया है, लेकिन इन शीर्ष पदों को भरने में अब तक गंभीरता नहीं दिखी है।

देखिए राजस्थान के किन-किन प्रमुख आयोगों में ताला लगने की नौबत है:

आयोग/संस्था का नामवर्तमान स्थिति (सच्चाई)आमजन पर पड़ रहा असर
लोकायुक्तमार्च, 2026 में पीके लोहरा की सेवानिवृत्ति के बाद से पद पूरी तरह खाली है।सरकारी दफ्तरों में अनियमितता और अकर्मण्यता की शिकायतों पर सुनवाई पूरी तरह ठप है।
मुख्य सूचना आयुक्तपिछले महीने एमएल लाठर का कार्यकाल पूरा होने से पद खाली।आवेदन आ चुके हैं, लेकिन चयन समिति की बैठक न होने से नियुक्ति अटकी है। आरटीआई अपीलें पेंडिंग हैं।
राज्य महिला आयोगअध्यक्ष और सदस्यों के सभी पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।प्रताड़ित महिलाओं की सुनवाई और मामलों के निस्तारण का काम रुका पड़ा है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगअध्यक्ष का पद पिछले 2 वर्षों से रिक्त है। सदस्यों के पद भी खाली हैं।बाल अपराधों और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर मॉनिटरिंग कमजोर हुई है।
राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोगहाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भवरू खान के बाद से कोई नया अध्यक्ष नहीं लगा।जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करने या बाहर करने का वैधानिक काम रुका है।
राज्य निःशक्तजन आयुक्तउमाशंकर शर्मा का कार्यकाल पूरा होने के बाद से पद खाली है।दिव्यांगों और निःशक्तजनों की प्रशासनिक सुनवाई में भारी समस्या आ रही है।

इसके अलावा राज्य आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति (SC) आयोग, अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग, और अल्पसंख्यक आयोग भी बिना अध्यक्षों के चल रहे हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनने वाली ‘बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति’ (बीसूका) में भी उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है।

आरपीएससी पर है इन बड़ी भर्तियों को पूरा कराने का दारोमदार

अध्यक्ष का पद खाली होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के मन में संशय है, क्योंकि वर्तमान में आयोग के पास कई महत्वपूर्ण भर्तियों को पूरा कराने की जिम्मेदारी है:

  • पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती प्रक्रिया
  • आरएएस (RAS) एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती-2026
  • सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2026
  • वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) और प्राध्यापक (कृषि) भर्ती
  • सांख्यिकी अधिकारी भर्ती

हाईकोर्ट की फटकार का भी असर नहीं: करीब 11 साल पहले भी ऐसी ही स्थिति आने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका दर्ज कर 3 महीने में पद भरने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में निर्देश दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद नियुक्तियों की कछुआ चाल ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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