जयपुर में अवैध पटाखा गोदाम ब्लास्ट ने ली 8 जिंदगी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया गहरा दुख

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो-नागोरियान थाना इलाके में मंगलवार को एक घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में संचालित अवैध पटाखा गोदाम में हुए भीषण विस्फोट और अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल और निजी चिकित्सालयों से आ रही ताजा विधिक व सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में मौतों की संख्या बढ़कर 8 हो चुकी है। राजस्थान में पिछले चार महीने के भीतर यह अपनी तरह की दूसरी सबसे बड़ी और खौफनाक औद्योगिक-आवासीय दुर्घटना है। इससे पूर्व इसी वर्ष फरवरी 2026 में अलवर जिले के भिवाड़ी कस्बे में एक अवैध पटाखा निर्माण इकाई में आग लगने से 7 मासूम श्रमिकों की जान चली गई थी। खो-नागोरियान की इस घटना ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध बारूद के कारोबार और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर विधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस भयावह हादसे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित प्रदेश के तमाम शीर्ष राजनेताओं ने गहरा विधिक दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा:

“जयपुर के खो-नागोरियान इलाके में हुए हादसे में नागरिकों की आकस्मिक मृत्यु की खबर अत्यंत हृदयविदारक है। जिला प्रशासन और संबंधित पुलिस अधिकारियों को राहत व रेस्क्यू ऑपरेशंस में पूरी तत्परता के साथ जुटने, घायलों को बिना किसी देरी के सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।”

मृतकों की सांख्यिकीय शिनाख्त और अस्पताल की विधिक स्थिति

जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विनोद शर्मा ने आधिकारिक तौर पर बताया कि हादसे में 8 मौतों की विधिक पुष्टि की जा चुकी है। चिकित्सा और प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 5 गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों ने सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के बर्न वार्ड में इलाज के दौरान दम तोड़ा, जबकि एक अज्ञात व्यक्ति को घटना स्थल से ही मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। दो अन्य गंभीर घायलों की मौत निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 8 मृतकों में से 7 मृतकों की विधिक शिनाख्त पूरी हो चुकी है, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:

  1. समीर, 2. आजिम, 3. नासिर, 4. अब्दुल वहीद, 5. रबिल, 6. बिलाल और 7. अशरफ। जबकि 1 अन्य मृतक का शव अत्यधिक झुलस जाने के कारण उसकी शिनाख्त के प्रयास डीएनए और फॉरेंसिक विंग द्वारा जारी हैं।

रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर: आग की लपटों से घिरे सड़क पर गिरे मजदूर

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने घटना के समय का जो खौफनाक विधिक मंजर बयां किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घनी आबादी के बीच स्थित उस दो मंजिला मकान में अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत आग की ऊंची लपटों से घिर गई। मकान के भीतर से चीखते-चिल्लाते और पूरी तरह आग की लपटों में लिपटे (झुलसे) हुए मजदूर बाहर की तरफ भागे, जिनमें से कुछ असहनीय दर्द के कारण दौड़ते-दौड़ते सीधे कंक्रीट की सड़क पर गिर पड़े और मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

स्थानीय निवासी लियाकत और अन्य युवाओं ने प्रशासनिक जाप्ते के पहुंचने से पहले अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के निजी टैंकर मंगवाए और पाइपों के जरिए आग बुझाते हुए मलबे के भीतर प्रवेश किया। स्थानीय लोग शुरुआती दौर में तीन से चार झुलसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रहे, जिन्हें तत्काल एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भिजवाया गया।

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल की दोटूक: “मकान मालिक की गिरफ्तारी तय”

घटनास्थल का दौरा करने के बाद जयपुर के पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) श्री सचिन मित्तल ने ‘Expose Now’ से विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि पूर्ण रूप से आवासीय और घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस निजी मकान का उपयोग पूरी तरह विधिक नियमों के खिलाफ जाकर ‘अवैध बारूद गोदाम’ के रूप में किया जा रहा था। कमिश्नर मित्तल ने कहा, “राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) और फॉरेंसिक टीमें मौके से रासायनिक साक्ष्य जुटा रही हैं। फॉरेंसिक जांच से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि मकान में रखी विस्फोटक सामग्री केवल पटाखे थी या कोई अन्य प्रतिबंधित घातक केमिकल। इस अवैध कारोबार के पीछे छिपे मुख्य गोदाम मालिक सहित उन सभी कतिपय रसूखदारों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) के तहत विधिक एफआईआर दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

पहले सिलेंडर फटा या बारूद? कलक्टर संदेश नायक ने शुरू कराया विधिक ऑडिट

जयपुर के जिलाधिकारी (कलक्टर) संदेश नायक ने प्रशासनिक जांच के विधिक आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रारंभिक विधिक सूचनाओं के अनुसार, आग मकान के कमरों में ठूंस-ठूंस कर रखी गई अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री के कारण तेजी से भड़की। आग लगने का वास्तविक और तकनीकी कारण विस्तृत फॉरेंसिक और फायर ऑडिट के बाद ही कागजों पर स्पष्ट हो सकेगा।

वहीं गोदाम के बिल्कुल पड़ोस में रहने वाले चश्मदीद लियाकत ने बताया कि आग भड़कने से ठीक पहले मकान के भीतर एक घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के फटने (Cylinder Blast) जैसी भयानक आवाज आई थी और मलबे की छानबीन के दौरान भारी मात्रा में एक नामी पटाखा ब्रांड के जले हुए लेबल्स और कार्टन बरामद हुए हैं। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM दक्षिण) युगांतर शर्मा ने बताया कि वर्तमान में गोदाम के अवैध संचालन के विधिक लाइसेंस, भूखंड के मालिकाना हक के दस्तावेज और नगर निगम के विधिक रिकॉर्ड्स को पूरी तरह सत्यापित (Verify) किया जा रहा है और लापरवाही बरतने वाले स्थानीय बीट कांस्टेबल और फायर इंस्पेक्टर्स की भूमिका की भी प्रशासनिक जांच की जा रही है।

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