भ्रष्टाचार पर विधिक प्रहार: रिश्वत की रंगी हुई राशि के साथ दबोचा गया सरकारी बाबू; पोकरण में मची अफरा-तफरी

Madhu Manjhi

जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एक बहुत बड़ी और ताबड़तोड़ विधिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। जैसलमेर एसीबी की विशेष सतर्कता टीम ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पोकरण स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग (CDPO कार्यालय) में तैनात सहायक प्रशासनिक अधिकारी (Assistant Administrative Officer) भवानी सिंह को 5 हजार रुपए की विधिक रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथों (Red Handed) गिरफ्तार किया है।

आरोपी अधिकारी ने यह रिश्वत एक गरीब आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े प्रशासनिक नोटिस के विधिक निस्तारण (निपटारे) और मामले को फाइल में ही दबाने की एवज में परिवादी से वसूली थी। दफ्तर के भीतर अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई से समूचे महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

नोटिस का डर दिखाकर परिवादी को कर रहा था मानसिक रूप से प्रताड़ित

इस पूरे भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित परिवादी ने हिम्मत दिखाते हुए जैसलमेर एसीबी कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया था कि उसके अधीन संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्र के एक विभागीय मामले में सीडीपीओ कार्यालय द्वारा पूर्व में एक विधिक नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के विधिक निस्तारण, स्पष्टीकरण को स्वीकार करने और पूरे मामले को रफा-दफा करने की एवज में कार्यालय का बाबू भवानी सिंह लगातार पैसों की डिमांड कर रहा था। परिवादी द्वारा असमर्थता जताने पर आरोपी अधिकारी द्वारा उसे बार-बार पद से हटाने और विधिक कार्रवाई की धमकी देकर मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था।

एसीबी का विधिक ट्रैप और सांख्यिकीय रिकवरी (10 जून 2026)

एसीबी मुख्यालय के भ्रष्टाचार उन्मूलन नियमों के तहत इस पूरी ट्रैप क्रोनोलॉजी को निम्नलिखित रूप से सांख्यिकीय और विधिक तौर पर अंजाम दिया गया:

  • गोपनीय सत्यापन (Verification): शिकायत प्राप्त होने के बाद एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नरपतचंद ने एक विशेष विधिक टीम के जरिए गोपनीय रूप से रिश्वत की मांग का सांख्यिकीय और वॉयस रिकॉर्डर के माध्यम से सत्यापन करवाया।
  • ट्रैप की विधिक टाइमलाइन: बुधवार दोपहर शिकायत सौ प्रतिशत सही पाए जाने पर एएसपी नरपतचंद के नेतृत्व में सीडीपीओ कार्यालय पोकरण में एक विधिक जाल (Trap) बिछाया गया।
  • रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही परिवादी ने आरोपी भवानी सिंह को उसके शासकीय कक्ष के भीतर 5,000 रुपए की विधिक रिश्वत राशि थमाई, वैसे ही सादे कपड़ों में मुस्तैद एसीबी के विधिक जांबाजों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कैमिकल युक्त पानी से हाथ धुलवाने पर आरोपी की उंगलियों से गुलाबी रंग छूटा, जिससे रिश्वत लेने की विधिक पुष्टि मौके पर ही कागजों में दर्ज हो गई।

सीडीपीओ दफ्तर में मची अफरा-तफरी; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में केस दर्ज

कार्रवाई के तुरंत बाद एसीबी की टीम आरोपी सहायक प्रशासनिक अधिकारी भवानी सिंह को विधिक हिरासत में लेकर पोकरण स्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची। एसीबी की इस अचानक हुई कार्रवाई के दौरान सीडीपीओ दफ्तर के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी अपनी सीटों को छोड़कर बाहर भागते हुए नजर आए।

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपतचंद ने बताया कि आरोपी भवानी सिंह के खिलाफ जैसलमेर चौकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 2026) की विभिन्न विधिक धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर आगे की कागजी कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही, एसीबी की एक सहायक टीम आरोपी के पैतृक आवास और बैंक खातों के विधिक दस्तावेजों की छानबीन (House Search) कर रही है, ताकि आय से अधिक संपत्ति के विधिक सुराग तलाशे जा सकें। ब्यूरो ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी मुलाजिम जायज काम के बदले विधिक रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज करवाएं।

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