राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती: डेढ़ साल में सैकड़ों अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज

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जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कदम उठाए हैं। सरकार का दावा है कि राज्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि 332 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 81 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देकर सेवा से हटाया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई गई है। विभिन्न विभागों में शिकायतों, सतर्कता जांच, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई और विभागीय जांच रिपोर्टों के आधार पर यह कदम उठाए गए हैं।

सरकार का कहना है कि जनता को पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से विभागों में लंबित मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई प्रक्रिया को तेज किया गया है।

कई विभागों के कर्मचारी कार्रवाई की जद में

सूत्रों के अनुसार जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें विभिन्न प्रशासनिक विभागों, स्थानीय निकायों, शिक्षा, राजस्व, पुलिस, पंचायत राज और अन्य सरकारी संस्थानों से जुड़े कार्मिक शामिल हैं।

इनमें से कई मामलों में रिश्वतखोरी, वित्तीय अनियमितता, कार्य में गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और सेवा नियमों के उल्लंघन जैसी शिकायतें सामने आई थीं। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भी सरकार का जोर

राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान करने की प्रक्रिया भी तेज की है, जिनका सेवा रिकॉर्ड लगातार खराब रहा है या जिन पर गंभीर शिकायतें दर्ज रही हैं। इसी क्रम में 81 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर किया गया।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकारी कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने और विभागों की कार्यक्षमता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लंबित मामलों की हो रही समीक्षा

सरकार विभिन्न विभागों में लंबित अनुशासनात्मक और भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की समीक्षा भी कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और जांच रिपोर्टों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

इसके साथ ही विभागीय स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने, डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष ने मांगा और बड़ा अभियान

सरकार की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। विपक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाना चाहिए तथा बड़े मामलों में शामिल प्रभावशाली अधिकारियों और नेटवर्क पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान निरंतर जारी रहेगा और किसी भी दोषी व्यक्ति को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

प्रशासनिक सुधारों पर सरकार का फोकस

राजस्थान सरकार का कहना है कि केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधारों के जरिए भी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। ई-गवर्नेंस, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया जा सके।

सरकार का मानना है कि सख्त कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए आम लोगों का सरकारी तंत्र पर विश्वास और मजबूत होगा।

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