टोंक: राजस्थान की राजनीति में नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) का मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा है। टोंक दौरे पर आए कांग्रेस सांसद और पूर्व डीजीपी हरीश चंद्र मीणा ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान देते हुए इसे देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जांच एजेंसियां केवल खरीदारों तक सीमित क्यों हैं, असली मास्टरमाइंड तक कब पहुंचेंगी?
‘संगठित अपराध’ और सीकर का जिक्र
सांसद मीणा ने पेपर लीक को एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक ‘संगठित अपराध’ करार दिया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “किसी भी गड़बड़ी की सुई घूम-फिरकर राजस्थान और फिर सीकर पर ही क्यों आ जाती है? सीकर कोचिंग हब है, जहाँ देश-दुनिया के बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन वहां ऐसे गिरोह क्यों फल-फूल रहे हैं जो पकड़े ही नहीं जाते?”
बांटने वालों पर उठाई उंगली
हरीश मीणा ने इस पूरे मामले की जड़ पर प्रहार करते हुए कहा:
“पेपर खरीदने वाला तो बहुत छोटा आदमी होता है, जो अपने बच्चे के भविष्य के लिए मजबूरी में फँस जाता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह पेपर बांट कौन रहा है? जब तक पेपर बांटने वाले बड़े ‘मगरमच्छों’ को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।”
देश की छवि और युवाओं का दर्द
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से न केवल युवाओं का मनोबल टूटता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि भी खराब होती है। सांसद ने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में देखा जाना चाहिए और एक ऐसी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जो भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोक सके।