NTA को भंग करने की उठी मांग: कांग्रेस और छात्र संगठनों ने घेरी सरकार

Madhu Manjhi

जयपुर। नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों ने अब राजस्थान में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लिया है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन NSUI और SFI ने सड़कों पर उतरकर सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विशेष रूप से राजस्थान के कोचिंग हब्स—जयपुर, कोटा और सीकर—को इस आंदोलन का केंद्र बनाया गया है, जहां NSUI के राष्ट्रीय स्तर के नेता और प्रमुख पदाधिकारी छात्रों की आवाज बुलंद करेंगे।

कोचिंग हब्स पर NSUI का फोकस

नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद NSUI ने राजस्थान के तीन सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्रों—जयपुर, कोटा और सीकर—में बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी की है। संगठन का मानना है कि इन शहरों में देश भर से आए लाखों छात्र रहते हैं, जो इस धांधली से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। NSUI नेता विनोद जाखड़ इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से शामिल होकर छात्रों को लामबंद करेंगे। संगठन का आरोप है कि परीक्षा रद्द होने या दोबारा होने की अनिश्चितता ने छात्रों को न केवल आर्थिक रूप से तोड़ा है, बल्कि वे भारी मानसिक तनाव में भी हैं।

NTA और JPC की मांग पर अड़ी कांग्रेस

कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों ने अब सीधे तौर पर NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे भंग करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि महज जांच काफी नहीं है, बल्कि इस मामले की गहराई से जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन होना चाहिए। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि जब तक पूरी व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा, तब तक परीक्षाओं की शुचिता बनी रहना मुश्किल है।

झुंझुनूं में SFI का उग्र प्रदर्शन

इधर, झुंझुनूं में छात्र संगठन SFI ने भी अपनी ताकत दिखाई है। राजकीय आरआर मोरारका महाविद्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए एसएफआई जिला अध्यक्ष आशीष पचार ने कहा कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है। छात्रों का कहना है कि दूर-दराज के इलाकों से आकर शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए कोचिंग का खर्च उठाना पहले ही मुश्किल होता है, और ऐसे में पेपर लीक की घटनाएं उनके सपनों को चकनाचूर कर देती हैं।

आगामी रणनीति: ‘सड़क से संसद तक’

छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें CBI की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, लेकिन राजस्थान की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

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