गर्मी में क्यों ‘ड्रेन’ हो जाती है आपकी एनर्जी? एक्सपर्ट से जानें अचानक कमजोरी और चक्कर आने की असल वजह

Madhu Manjhi

भारत में गर्मी का मौसम सिर्फ चिलचिलाती धूप ही नहीं, बल्कि भीषण उमस और पसीना भी साथ लेकर आता है। इस मौसम में अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि बिना किसी भारी काम के भी उन्हें अचानक तेज थकान, सुस्ती और चक्कर आने जैसा महसूस होने लगता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह केवल बाहरी गर्मी का असर नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर के भीतर चलने वाली जटिल प्रक्रियाएं जिम्मेदार हैं। डॉ. राजीव चौधरी (इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल) ने बताया कि गर्मी में शरीर ‘इमरजेंसी मोड’ में काम करता है, जिससे हमारी ऊर्जा तेजी से खत्म होती है।

1. डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ना

गर्मियों में कमजोरी का सबसे प्राथमिक कारण डिहाइड्रेशन है। जब हमें पसीना आता है, तो शरीर से केवल पानी ही बाहर नहीं निकलता, बल्कि सोडियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी बह जाते हैं। ये मिनरल्स हमारे नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के सही संचालन के लिए अनिवार्य हैं। इनकी कमी होते ही ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है, जिससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है और हमें चक्कर या थकान महसूस होती है।

2. शरीर का तापमान नियंत्रित करने का ‘ओवरवर्क’

जब बाहर का तापमान 40 डिग्री के पार होता है, तो हमारा शरीर अंदरूनी तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रखने के लिए संघर्ष करता है। इस प्रक्रिया में दिल को ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है ताकि रक्त त्वचा की सतह तक पहुंचे और पसीने के माध्यम से शरीर को ठंडा कर सके। इस अतिरिक्त मेहनत में शरीर की बहुत अधिक कैलोरी और ऊर्जा खर्च हो जाती है, जिससे हम सुस्त महसूस करने लगते हैं।

3. खान-पान और लो ब्लड शुगर

गर्मी में अक्सर भूख मर जाती है, जिसे ‘एनोरेक्सिया’ जैसी स्थिति माना जाता है। लोग भारी भोजन छोड़कर केवल तरल पदार्थों पर आ जाते हैं। पर्याप्त पोषण न मिलने से ब्लड शुगर लेवल अचानक गिर सकता है। इसके अलावा, एनीमिया या थायरॉइड जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए यह मौसम और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कमजोरी को मात देने के लिए एक्सपर्ट टिप्स

  • स्मार्ट हाइड्रेशन: केवल सादा पानी पीना काफी नहीं है। इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS) का सेवन करें। दिन में कम से कम 3-4 लीटर तरल पदार्थ जरूर लें।
  • वाटर-रिच डाइट: अपने भोजन में तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे फलों को शामिल करें। इनमें पानी की मात्रा 90% से अधिक होती है, जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं।
  • धूप से दूरी: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। यदि जाना जरूरी हो, तो गहरे रंगों के बजाय हल्के सूती कपड़े पहनें और सिर को स्कार्फ या टोपी से ढकें।
  • नींद की शक्ति: गर्मी के कारण अक्सर रात में नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं मिलता। सुनिश्चित करें कि आप 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि मेटाबॉलिज्म सही बना रहे।

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