बारां में टूटी 128 साल पुरानी परंपरा: इस बार नहीं निकलेगी गणगौर की शाही सवारी, फंड की कमी और महंगाई बनी वजह

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बारां: राजस्थान के बारां शहर की सांस्कृतिक विरासत को इस वर्ष एक बड़ा झटका लगा है, जहाँ पिछले 128 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही गणगौर शोभायात्रा की परंपरा टूटने जा रही है। गणगौर सेवा समिति ने निर्णय लिया है कि आर्थिक तंगी और प्रशासनिक सहयोग के अभाव में गुरुवार को शहर में भव्य शोभायात्रा नहीं निकाली जाएगी। यह खबर बारां की उन हजारों महिलाओं और श्रद्धालुओं के लिए मायूस करने वाली है, जो हर साल ईसर-गणगौर की पूजा-अर्चना के बाद इस शोभायात्रा के दर्शन के लिए उत्साहित रहती हैं।

अनुदान की राशि अटकी, चंदे से पूरा नहीं हो पा रहा 2.5 लाख का खर्च

शोभायात्रा को रद्द करने का यह कड़ा फैसला गणगौर सेवा समिति की हाल ही में हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता दिनेश गौतम ने की। समिति के अध्यक्ष दुष्यंत शर्मा और संरक्षक ललित मोहन खंडेलवाल ने बताया कि इस भव्य आयोजन को संपन्न कराने में करीब 2 से 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है। अब तक यह आयोजन बाजार से एकत्रित चंदे और नगर परिषद द्वारा दिए जाने वाले अनुदान के सहयोग से पूर्ण होता आया था। पदाधिकारियों का कहना है कि एक तरफ महंगाई की मार है और दूसरी तरफ नगर परिषद से प्रस्तावित अनुदान की राशि नहीं मिल पाई है, जिसके कारण समिति ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

इस महत्वपूर्ण बैठक में गणगौर सेवा समिति के कई प्रमुख सदस्य और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने वित्तीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में रामभरोस सेन, बुद्धिप्रकाश जोशी, मनोज शर्मा, विनोद पंडित, और पार्षद आयुष सहित अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया। सभी ने एकमत होकर माना कि पर्याप्त फंड के बिना शोभायात्रा का गरिमापूर्ण आयोजन संभव नहीं है। प्रशासन और नगर परिषद के इस रवैये से शहर के सांस्कृतिक संगठनों में गहरा रोष व्याप्त है, क्योंकि 128 साल पुराने इस लोक पर्व का थमना शहर की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा कर रहा है।

21 मार्च को है गणगौर, घरों में होगी पूजा-अर्चना

भले ही सड़कों पर शाही लवाजमा नहीं दिखेगा, लेकिन घरों में गणगौर का पर्व पारंपरिक श्रद्धा के साथ 21 मार्च को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 16 दिनों तक कठोर तपस्या की थी, जिसे याद करते हुए सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। इस पर्व में हर पूजा सामग्री 16 की संख्या में अर्पित करने का विशेष महत्व है। बारां की महिलाएं ईसर-गणगौर की पूजा और पकवान बनाकर अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट करेंगी, हालांकि उन्हें इस साल माता की शोभायात्रा के दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा।

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