राजस्थान की 16वीं विधानसभा का छठा (मानसून) सत्र आगामी 20 अगस्त 2026 से शुरू होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। सत्र की कार्यवाही 20 अगस्त को सुबह 11 बजे विधानसभा भवन में शुरू होगी। माना जा रहा है कि यह सत्र लगभग एक सप्ताह तक चल सकता है, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना
संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति प्रदान की है। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। विधानसभा प्रशासन ने सदन के सुचारू संचालन के लिए सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
UCC बिल पर रह सकती हैं सभी की नजरें
मानसून सत्र में राज्य सरकार समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) से संबंधित विधेयक पेश कर सकती है। इससे पहले राज्य सरकार कई बार संकेत दे चुकी है कि उत्तराखंड की तर्ज पर राजस्थान में भी UCC लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यदि यह विधेयक सदन में पेश होता है तो इस पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा होने की संभावना है।
ट्री एक्ट बिल भी हो सकता है पेश
सरकार इस सत्र में खेजड़ी और कल्पवृक्ष संरक्षण से जुड़ा ट्री एक्ट बिल भी सदन के पटल पर रख सकती है। इसका उद्देश्य राजस्थान के पारंपरिक एवं पर्यावरणीय महत्व वाले वृक्षों के संरक्षण को कानूनी आधार प्रदान करना है। सरकार पहले ही इस विधेयक का मसौदा तैयार होने की जानकारी दे चुकी है।
कई अन्य विधेयकों पर भी रहेगी नजर
सूत्रों के अनुसार सरकार शिक्षा, वित्तीय प्रबंधन, कृषि और जनहित से जुड़े कुछ संशोधन विधेयक भी इस सत्र में पेश कर सकती है। हालांकि अंतिम कार्यसूची सत्र शुरू होने से पहले जारी की जाएगी।
विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें प्रमुख रूप से—
- पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं
- युवाओं से जुड़े रोजगार के मुद्दे
- पंचायत एवं निकाय चुनाव
- कानून-व्यवस्था
- महिला सुरक्षा
- मानसून के दौरान फसल नुकसान
- ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट
- बिजली आपूर्ति और किसानों की समस्याएं
इन मुद्दों पर सदन में तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
संवैधानिक बाध्यता के तहत बुलाया गया सत्र
भारतीय संविधान के अनुसार दो विधानसभा सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। राजस्थान विधानसभा का पिछला बजट सत्र 10 मार्च 2026 को समाप्त हुआ था। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत 9 सितंबर से पहले नया सत्र बुलाना आवश्यक था। इसी कारण सरकार ने 20 अगस्त से मानसून सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक रूप से भी अहम रहेगा यह सत्र
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले होने वाला यह विधानसभा सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार जहां अपनी उपलब्धियों और नए विधेयकों के जरिए जनता के बीच संदेश देने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष प्रदेश के विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाएगा। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन में जोरदार बहस और राजनीतिक गर्माहट देखने को मिल सकती है।