राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बच्चों के पोषण के लिए भेजे गए दूध पाउडर की कथित कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है। जयपुर ग्रामीण पुलिस ने चौमूं क्षेत्र के चितवाड़ी गांव में कार्रवाई करते हुए करीब 3,000 किलोग्राम सरकारी मिल्क पाउडर से भरा एक वाहन पकड़ा है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह दूध पाउडर सरकारी स्कूलों में वितरण के बजाय खुले बाजार और मावा बनाने के लिए बेचा जा रहा था। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पन्नाधाय बाल गोपाल योजना का दूध बाजार में पहुंचा
जब्त किया गया दूध पाउडर पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को वितरित किया जाना था। पुलिस के अनुसार, यह स्टॉक स्कूलों तक पहुंचने के बजाय बीच में ही डायवर्ट कर दिया गया। मामले की सूचना मिलने पर राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की ओर से सामोद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एक्सपायरी पैकेट भी मिले
पुलिस कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए स्टॉक में सैकड़ों एक्सपायरी मिल्क पाउडर के पैकेट भी मिले हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पैकेटों का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया जा रहा था। आशंका है कि इनसे मावा और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जा रहे थे।
पूरे नेटवर्क की जांच शुरू
पुलिस का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जांच इस बात की भी की जा रही है कि सरकारी गोदामों या स्कूलों से यह दूध पाउडर किस स्तर पर बाहर निकाला गया और इसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
पूर्व मुख्यमंत्री ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण के लिए चलाई जा रही योजना में इस तरह की अनियमितता बेहद गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
राजस्थान में इससे पहले भी सरकारी स्कूलों के लिए भेजे गए मिल्क पाउडर की कथित बिक्री और दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं। पूर्व में ऐसे मामलों में कई शिक्षकों पर कार्रवाई भी की गई थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर सरकारी योजनाओं की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।