राजस्थान: राज्य में हरियाली बढ़ाने के नाम पर वन विभाग द्वारा चलाए गए पौधारोपण अभियानों में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। एक ताजा जांच रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने पिछले 4 वर्षों में राज्य की 246 साइट्स पर पौधारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन किया है। फाइलों में जहां लाखों पौधे लहलहा रहे हैं, वहीं वास्तविकता में उन साइट्स पर न तो गड्ढे खोदे गए और न ही पौधे लगाए गए।
कागजों में हुआ ‘हरा-भरा’ प्रदेश
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का बंदरबांट किया गया है। प्रदेश के 48 डिविजन में यह योजना पूरी तरह फेल पाई गई है। कई स्थानों पर तो पौधारोपण का क्षेत्रफल ही कागजों में कम कर दिया गया ताकि बजट में हेराफेरी की जा सके। बारां, कोटा, झालावाड़, हनुमानगढ़ और धौलपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा साइट्स फेल मिली हैं।
कैसे हुआ करोड़ों का भ्रष्टाचार?
नियमों के तहत किसी भी साइट पर पौधारोपण के लिए 5 साल तक का बजट निर्धारित होता है। इसमें पहले साल गड्ढे खोदने और तैयारी, दूसरे साल रोपाई, और अगले तीन वर्षों तक पौधों के रखरखाव व चौकीदारी के लिए राशि जारी की जाती है। उदाहरण के तौर पर RFBP-2 योजना के तहत 50 हेक्टेयर की एक साइट के लिए करीब 42 लाख रुपये का बजट मिलता है। इसी तरह 246 साइट्स के हिसाब से यह हेराफेरी 100 करोड़ के पार पहुंच गई है।
अधिकारियों की चुप्पी
जब इस गंभीर अनियमितता के संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) पवन उपाध्याय से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने मामले पर बात करने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था, “आई डोंट टॉक टू एनी कॉरस्पोंडेंट” (मैं किसी संवाददाता से बात नहीं करता)। निगरानी एवं मूल्यांकन मॉड्यूल की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को दबाए बैठे हैं और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।