जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल जरूरतमंदों को सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनमें स्वाभिमान, आत्मसामर्थ्य और पुरुषार्थ जगाना है। सेवा ऐसी होनी चाहिए कि एक दिन ‘सेवा लेने वाले हाथ, स्वयं सेवा देने वाले बन जाएं।’ सोमवार को सेवा भारती (जयपुर इकाई) के वार्षिकोत्सव को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने समाज के समर्थ लोगों से सेवा बस्तियों में जाकर प्रत्यक्ष सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

‘मलिन बस्ती’ नहीं, ‘सेवा बस्ती’ के रूप में करें काम
होसबाले ने बताया कि जयपुर में 257 सेवा बस्तियां चिह्नित हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए काम करने की भारी आवश्यकता है। संघ ने अभावों से ग्रस्त क्षेत्रों को ‘मलिन बस्ती’ कहने के बजाय ‘सेवा बस्ती’ का नाम दिया है, ताकि इन्हें सामाजिक दायित्व के केंद्र के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि समाज में आर्थिक सहयोग देने वालों की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि लोग खुद इन बस्तियों के संस्कार केंद्रों में जाएं। जन्मदिन और दीपावली जैसे अवसर वहां के बच्चों के साथ मनाएं, ताकि सामाजिक एकात्मता और अपनत्व का भाव मजबूत हो सके।
हर व्यक्ति में है ईश्वर का वास, स्वाभिमान जगाना आवश्यक
सरकार्यवाह ने महर्षि वाल्मीकि की जयंती का स्मरण करते हुए भगवान राम द्वारा केवट, शबरी और एक छोटी-सी गिलहरी को दिए गए सम्मान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में ईश्वर का वास है, इसलिए सेवा के साथ यह विश्वास दिलाना भी जरूरी है कि वे भी समाज को कुछ दे सकते हैं। वर्तमान में सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं देशभर में करीब डेढ़ लाख छोटे-बड़े सेवा कार्य सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं।
वेबसाइट, ऐप और पुस्तक का हुआ विमोचन
वार्षिकोत्सव में नवल पीठाधीश्वर संत मुन्ना दास जी खोडा का पावन सान्निध्य रहा। मुख्य अतिथि के रूप में मंगलम् ग्रुप के निदेशक संजय गुप्ता और विशिष्ट अतिथि के रूप में निखिल जैन व विजेंद्र सिंह तंवर उपस्थित रहे। इस अवसर पर सेवा भारती की नई वेबसाइट, मोबाइल ऐप और ‘भारतीय संस्कृति में सेवा परंपरा’ पुस्तक के विशेषांक का विधिवत विमोचन किया गया। साथ ही, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित ‘यशोदा बाल सेवा केंद्र’ के नवनिर्मित भवन का डिजिटल उद्घाटन भी हुआ।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सेवा बस्तियों के बच्चों ने सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर आधारित एक शानदार नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। गौरतलब है कि वर्तमान में जयपुर महानगर की 257 बस्तियों में सेवा भारती की ओर से 379 सेवा प्रकल्प (शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन) संचालित किए जा रहे हैं।
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