जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को जयपुर महानगर के मानसरोवर भाग में ‘उद्भव 2026’ विराट पथ संचलन एवं उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। वीटी रोड स्थित दशहरा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासित कदमताल करते हुए स्वयंसेवकों ने संगठन शक्ति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकात्मता का कड़ा संदेश दिया। इस भव्य आयोजन में करीब 5000 गणवेशधारी स्वयंसेवक उपस्थित रहे, जिनमें से 2700 ने पथ संचलन में भाग लिया। इसके अतिरिक्त मातृशक्ति, युवाओं और विभिन्न वर्गों के करीब 1200 समाजबंधुओं ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।


तीन संगम स्थलों से निकला अनुशासित संचलन
मानसरोवर क्षेत्र में पथ संचलन के लिए तीन प्रमुख संगम स्थल निर्धारित किए गए थे— नीरजा मोदी स्कूल (शिप्रा पथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (शांति मार्केट) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (महिमा एलेंजिया रोड, पत्रकार कॉलोनी)। दोपहर 3 बजे इन स्थलों से रवाना होकर स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों से होते हुए वीटी रोड चौराहा और न्यू सांगानेर रोड के संगम बिंदु पर एकत्रित हुए। संचलन में पहली बार शामिल हुए बाल स्वयंसेवकों का उत्साह और उनकी कदमताल विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन अनिल ओक ने किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय थल सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल जोगेन्द्र सिंह उपस्थित रहे।
व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य: जसवंत खत्री
कार्यक्रम में मुख्य बौद्धिक वक्ता के रूप में बोलते हुए संघ के क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री ने RSS की 101 वर्षों की यात्रा को स्वयंसेवकों के त्याग, तपस्या और निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित करना और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत को परम वैभव की ओर ले जाना है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और नागरिकों में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध जागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
‘पंच परिवर्तन’ से आएगा सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव
क्षेत्र कार्यवाह ने समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ‘पंच परिवर्तन’ के पांच प्रमुख आयामों को दैनिक व्यवहार में उतारने का आह्वान किया:
- सामाजिक समरसता: जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और आत्मीयता रखना, जिसकी शुरुआत स्वयं के घर से हो।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद और संस्कार मजबूत करना, बच्चों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराना और तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
- स्व का बोध (स्वदेशी): भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय पहचान के प्रति आत्मीयता विकसित करते हुए स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करना।
- पर्यावरण संरक्षण: जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण दोहन।
- नागरिक शिष्टाचार: यातायात नियमों का पालन, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और दूसरों के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार।
कार्यक्रम के अंत में समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर राष्ट्रहित के कार्यों से जोड़ने और वैचारिक बदलाव के साथ-साथ व्यावहारिक बदलाव लाने का संकल्प लिया गया।
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