राजस्थान के बहुचर्चित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा-2021 पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की कार्रवाई लगातार जारी है। एसओजी ने इस महाघोटाले में एक और बड़ी गिरफ्तारी करते हुए 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी मनीष दाधीच को दबोचा है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार अभ्यर्थी ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा द्वारा लीक किए गए प्रश्नपत्र को परीक्षा से ठीक पहले पढ़कर लिखित परीक्षा दी थी।
पूछताछ और एसओजी की जांच में सामने आया है कि आरोपी मनीष दाधीच ने अपने भाई पुरुषोत्तम दाधीच और संदीप कुमार लाटा के जरिए यह लीक पेपर हासिल किया था। बाबूलाल कटारा के सिंडिकेट से निकले इस पेपर को रटने का ही नतीजा था कि मनीष ने लिखित परीक्षा के हिंदी विषय में 200 में से 170.08 और सामान्य ज्ञान (GK) में 200 में से 158.69 जैसे बेहद ऊंचे अंक हासिल कर लिए थे। हालांकि, नकल के सहारे लिखित परीक्षा की मेरिट में झंडे गाड़ने वाले इस अभ्यर्थी की पोल साक्षात्कार (इंटरव्यू) में खुल गई। इंटरव्यू में न्यूनतम निर्धारित अंक नहीं मिल पाने के कारण उसका अंतिम चयन होने से बच गया।
इस पूरे नेटवर्क में आरोपी के भाई पुरुषोत्तम दाधीच की मुख्य भूमिका रही थी। एसओजी ने विगत 2 जून 2025 को पुरुषोत्तम दाधीच और 4 जून 2025 को संदीप कुमार लाटा को गिरफ्तार किया था। जांच में यह बात प्रमाणित हुई थी कि इन दोनों ने बाबूलाल कटारा से पेपर प्राप्त कर अपने परिचित अभ्यर्थियों को पढ़वाया और अनुचित लाभ पहुंचाया। दोनों के खिलाफ 31 जुलाई 2025 को ही कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। हालांकि, वर्तमान में ये दोनों आरोपी सुप्रीम कोर्ट से जमानत प्राप्त कर बाहर हैं और अपने-अपने संबंधित विभागों से निलंबित चल रहे हैं।
एसओजी के अनुसार, पेपर लीक का भंडाफोड़ होने के बाद से ही आरोपी मनीष दाधीच गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी धरपकड़ के लिए पुलिस अधीक्षक (SOG) की तरफ से 10 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया गया था। आखिरकार एसओजी की तकनीकी और फील्ड टीम ने उसे 19 जून को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में पेश किए जाने के बाद उसे 23 जून 2026 तक के लिए पुलिस रिमांड पर सौंपा गया था। डीडवाना-कुचामन जिले के खुनखुना थाना क्षेत्र स्थित सागू कलां (सागू छोटी) के रहने वाले महावीर प्रसाद शर्मा के पुत्र मनीष की गिरफ्तारी के साथ ही, इस समूचे प्रकरण में अब तक कुल 147 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।