RMC फर्जी रजिस्ट्रेशन कांड: SOG ने 3 और डॉक्टरों को किया अरेस्ट

Madhu Manjhi

जयपुर | राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रदेश के बहुचर्चित फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े में एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसओजी ने शनिवार को कजाकिस्तान से MBBS कर लौटे तीन ऐसे डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने लाखों रुपये की रिश्वत देकर अपने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए थे। आरोप है कि इन तीनों ने कुल 74 लाख रुपए देकर ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट’ (FMG) परीक्षा पास करने का फेक सर्टिफिकेट बनवाया और इसी फर्जीवाड़े के आधार पर न केवल सरकारी मेडिकल कॉलेजों से इंटर्नशिप पूरी की, बल्कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना अस्थायी रजिस्ट्रेशन (Temporary Registration) भी करवा लिया।

एसओजी ने इस मामले में डॉ. दीपक यादव (28) निवासी चौमूं (जयपुर), डॉ. राजू गुर्जर (28) निवासी डीग और डॉ. नरेश गुर्जर (30) निवासी कठूमर (अलवर) को गिरफ्तार किया है। फिलहाल एसओजी की टीम इन तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने इस फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बताया कि ये तीनों आरोपी कजाकिस्तान से MBBS करके वर्ष 2021 और 2022 में भारत लौटे थे। भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए इन्हें राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित FMG स्क्रीनिंग एग्जाम पास करना अनिवार्य था। कई बार प्रयास करने के बाद भी जब ये परीक्षा पास नहीं कर सके, तो इन्होंने शॉर्टकट और भ्रष्टाचार का रास्ता चुना।

जांच में सामने आया है कि डॉ. दीपक यादव ने मास्टरमाइंड भानाराम के साले के जरिए 24 लाख रुपए देकर, डॉ. नरेश गुर्जर ने अपने एक साथी इंद्रराज सैनी के जरिए 23 लाख रुपए देकर और डॉ. राजू गुर्जर ने 27 लाख रुपए देकर FMG एग्जाम पास करने के फेक सर्टिफिकेट बनवाए। इस फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए इन तीनों ने क्रमशः दौसा, अलवर और हनुमानगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी कर ली। आईजी (SOG) अजयपाल लांबा ने बताया कि इस पूरे खेल में RMC के कर्मचारी और अधिकारियों की गहरी मिलीभगत सामने आई है। जांच में अब तक ऐसे 100 से ज्यादा फर्जी डॉक्टरों को चिह्नित किया जा चुका है, जो इस रैकेट का हिस्सा हैं।

इस बड़े मेडिकल घोटाले में एसओजी अब तक 17 फर्जी डॉक्टरों, RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मास्टरमाइंड भानाराम माली और एक अन्य दलाल को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। मास्टरमाइंड भानाराम हर एक फर्जी डॉक्टर से फेक सर्टिफिकेट बनवाने और RMC में रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 20 से 30 लाख रुपए तक की वसूली करता था।

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