जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित शासन सचिवालय (Secretariat Campus) की सुरक्षा, गोपनीयता और प्रशासनिक अनुशासन को अभूतपूर्व रूप से चाक-चौबंद करने के विधिक उद्देश्य से राज्य सरकार ने कई कड़े और बड़े नीतिगत प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। सचिवालय परिसर के भीतर अब बिना पूर्व प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार का फोटो खींचना या वीडियो बनाना विधिक रूप से एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। ऐसा करने वाले किसी भी बाहरी नागरिक या कर्मचारी के खिलाफ सीधे विधिक केस दर्ज (FIR) कराया जाएगा।
राज्य के कार्मिक विभाग (Department of Personnel) ने इस संबंध में एक विस्तृत और कड़ा आधिकारिक सर्कुलर (Circular) जारी किया है। इन पाबंदियों को विधिक रूप से तुरंत प्रभाव से धरातल पर सख्ती से लागू करने के कड़े आदेश सचिवालय सुरक्षा विंग को दिए गए हैं।
सचिवालय के नए विधिक एवं प्रशासनिक नियम
कार्मिक विभाग की सचिव अर्चना सिंह की ओर से जारी किए गए इस नए आधिकारिक सर्कुलर के तहत सुरक्षा और गोपनीयता के सांख्यिकीय मानकों को निम्नलिखित श्रेणियों में विधिक रूप से वर्गीकृत किया गया है:
1. आम जनता के लिए समय सीमा और नो-एंट्री क्रोनोलॉजी
- निर्धारित समय (Timing Windows): अब सचिवालय परिसर में अस्थायी पास (Temporary Pass) के आधार पर आने वाले आम लोगों को सुबह 9:30 बजे से पहले और शाम 6:00 बजे के बाद विधिक रूप से प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- अवकाश के दिनों के विधिक नियम: राजकीय अवकाश या शनिवार-रविवार के छुट्टियों के दिनों में किसी भी अस्थायी पासधारक बाहरी व्यक्ति या उनके निजी वाहनों को सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा।
- विभागीय सिफारिश अनिवार्य: यदि किसी दूर-दराज से आए परिवादी को छुट्टी के दिन किसी आपातकालीन कार्य से सचिवालय जाना है, तो संबंधित विभाग के अफसर या सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुरक्षा नियंत्रण कक्ष (Security Control Room) को लिखित या टेलीफोनिक विधिक सिफारिश भेजनी होगी, तभी प्रवेश संभव होगा।
सचिवालय सुरक्षा मैट्रिक्स का सांख्यिकीय वर्गीकरण (2026)
सुरक्षा और गोपनीयता की संवेदनशीलता के आधार पर नए नियमों के तकनीकी मानकों को नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:
| विधिक नियम एवं पाबंदियां (Security Matrix) | वर्तमान विधिक स्थिति और दंडात्मक प्रावधान (Legal Status) |
| फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी दर्जा | पूर्ण रूप से ‘नो-फोटोग्राफी जोन’ (No-Photography Zone) घोषित। |
| प्रवेश की विधिक अनुमति (आम जन) | केवल वर्किंग आवर्स (सुबह 09:30 AM से शाम 06:00 PM) के भीतर। |
| सुरक्षाकर्मियों की तलाशी का विधिक अधिकार | परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति और वाहन की शत-प्रतिशत विधिक तलाशी। |
| स्टाफ विधिक अनिवार्यता | समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सरकारी आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य। |
| नियम उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई | संबंधित सेवा नियम, सुरक्षा नियमावली और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस। |
ट्रांसफर से बैन हटते ही उमड़ी भीड़; सुरक्षा और गोपनीयता बनी विधिक चुनौती
प्रशासनिक गलियारों में इस नए कड़े सर्कुलर के समय को लेकर कई तरह की राजनैतिक और विधिक चर्चाएं तेज हैं। गौरतलब है कि हाल ही में 19 जून को राज्य सरकार ने तबादलों से प्रतिबंध (Transfer Ban) विधिक रूप से हटाया है। इसके बाद से ही अपनी डिजायर और तबादला सूचियों को लेकर पूरे प्रदेश से हजारों की सांख्यिकीय तादाद में लोग रोजाना सचिवालय पहुंच रहे हैं।
कार्मिक विभाग के विधिक नोट के अनुसार:
“सचिवालय परिसर सुरक्षा और गोपनीयता की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील (Highly Sensitive Category) कार्यालयों की श्रेणी में आता है। देखने में आया है कि ऑफिस टाइम से पहले, बाद में और छुट्टियों के दिनों में भी अस्थायी पासधारक अवांछित रूप से कॉरिडोर और विंग्स में घूमते रहते हैं। इससे न केवल रूटीन सरकारी कामकाज में विधिक रुकावट आती है, बल्कि राजकीय फाइलों और दस्तावेजों की विधिक गोपनीयता भंग होने की पूरी संभावना बनी रहती है।”
दूर-दराज से आने वाले परिवादियों की चिंता; पूर्ववर्ती सरकारों के मौखिक आदेश अब लिखित विधिक नियम
इस नए सर्कुलर के लागू होने से उन दूर-दराज के जिलों (जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा) से आने वाले आम नागरिकों को थोड़ी विधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जो देर शाम तक मंत्रियों या वरिष्ठ सचिवों से जन-सुनवाई के लिए सचिवालय के बाहर इंतजार करते हैं। कई बार मंत्रियों की बैठकें देर रात तक चलती हैं, ऐसे में 6 बजे के बाद प्रवेश बंद होने से जन-सुनवाई का विधिक ढांचा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
यदि इतिहास के विधिक पन्नों को पलटें, तो पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान भी सचिवालय में डिजिटल कैमरे और वीडियोग्राफी पर मौखिक पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन समय के साथ उसमें ढील दे दी गई थी। इस बार भजनलाल सरकार ने इसे पूरी तरह लिखित विधिक रूप प्रदान करते हुए सुरक्षाकर्मियों को सख्त हिदायत दी है कि नियमों की अवहेलना करने वाले रसूखदारों के वाहनों को भी मुख्य द्वार पर ही विधिक रूप से सीज कर दिया जाए।