डिजिटल व्यवस्था बनी मुसीबत! राजस्थान के सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में सर्वर फेल, जयपुर से अजमेर तक जनता परेशान

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जयपुर। राजस्थान सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग (Registration and Stamps Department) इन दिनों गंभीर तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहा है। प्रदेश में ऑनलाइन ‘ई-पंजीयन’ प्रणाली के बार-बार ठप होने से जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्रियों का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इस तकनीकी खराबी का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को भी स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के रूप में भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दफ्तरों में घंटों इंतजार, फिर भी खाली हाथ लौट रहे लोग

राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोग अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में पहुंच रहे हैं। वर्तमान में दस्तावेजों की तैयारी से लेकर अंतिम सबमिशन तक के सभी चरण पूरी तरह डिजिटल और ऑनलाइन हैं। ऐसे में नेशनल इन्फर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के सर्वर की धीमी गति या पूरी तरह बंद होने के कारण पूरी प्रक्रिया ठप हो जाती है। दूरदराज के इलाकों से जरूरी काम छोड़कर आने वाले लोगों को पूरा दिन दफ्तरों में बैठकर सर्वर ठीक होने का इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में तो अंतिम समय पर लिंक फेल होने के कारण लोगों को नई तारीख लेकर वापस लौटना पड़ रहा है।

लीगल एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल: सर्वर डाउन होना अब रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। जयपुर से लेकर अजमेर तक संबंधित अधिकारियों के पास इस तकनीकी समस्या का कोई स्पष्ट और स्थाई समाधान दिखाई नहीं देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बार-बार होने वाली खराबी और जनता की परेशानी के लिए आखिर किसकी जवाबदेही तय की जाएगी?

स्थायी समाधान की उठ रही मांग

मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग ने जिस डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत काम को पारदर्शी, आसान और तेज बनाने के लिए की थी, वही अब सिस्टम के कमजोर तकनीकी ढांचे के कारण गले की फांस बनती जा रही है। जमीन-जायदाद के जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकार को तुरंत ई-पंजीयन पोर्टल की सर्वर क्षमता (Server Capacity) बढ़ानी होगी और इसके तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा। नियमित मॉनिटरिंग और बैकअप सिस्टम न होने से न केवल आमजन के समय और संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि सरकार का खजाना भी प्रभावित हो रहा है।

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