जयपुर। राजस्थान में कृषि और काश्तकारों के हित में आज से एक बेहद आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में अब खाद (उर्वरक) का वितरण पारंपरिक तरीकों के बजाय सीधे ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) के माध्यम से किया जाएगा। इस नई प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार आज से दो जिलों में एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रही है।
राजसमंद और सिरोही से होगा शंखनाद
इस डिजिटल मुहिम की शुरुआत के लिए प्रथम चरण में प्रदेश के सिरोही और राजसमंद जिलों को चुना गया है। आज दोपहर 3 बजे राजसमंद में कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल इस महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। इस दौरान जिन किसानों ने मोबाइल ऐप के जरिए पहले से खाद की प्री-बुकिंग करवाई है, उन्हें मौके पर ही नए सिस्टम के तहत उर्वरक वितरित कर योजना की शुरुआत की जाएगी।
आंकड़ों में समझिए योजना की पहुंच:
- पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुने गए दोनों जिलों (राजसमंद और सिरोही) में अब तक करीब ढाई लाख (2.5 लाख) किसानों ने अपनी फार्मर आईडी बनवा ली है।
- अगर पूरे राजस्थान की बात करें, तो अब तक प्रदेश के रिकॉर्ड 86.66 लाख किसान इस डिजिटल फार्मर आईडी सिस्टम से जुड़ चुके हैं।
पारदर्शिता और कालाबाजारी पर रोक की उम्मीद
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नई तकनीक आधारित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उर्वरक वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। फार्मर आईडी से लिंक होने के बाद असली और जरूरतमंद किसानों तक खाद आसानी से पहुंचेगी। इससे खाद की जमाखोरी, लंबी लाइनों और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर पूरी तरह से लगाम कसी जा सकेगी। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस सिस्टम को जल्द ही पूरे राजस्थान में अनिवार्य कर दिया जाएगा।