जयपुर से लेकर बाड़मेर तक सड़कों पर ‘सिंघम अवतार’ में दिखी पुलिस; एडीजी डॉ. बी एल मीणा बोले— “यह केवल चालान नहीं, सड़क सुरक्षा का विधिक सबक है”

Madhu Manjhi

जयपुर। प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित, अनुशासित और रसूखदारों के वीआईपी (VIP) कल्चर से मुक्त कराने के विधिक उद्देश्य से राजस्थान पुलिस इन दिनों बेहद आक्रामक और एक्शन मोड में नजर आ रही है। महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े विधिक दिशा-निर्देशों के तहत पूरे राज्य में चलाए जा रहे ‘विशेष यातायात एवं कानून पालन अभियान’ के आठवें दिन पुलिस महकमे ने अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेशभर में विभिन्न जिलों के चौराहों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर नाकाबंदी कर पुलिस ने कुल 8,448 वाहन चालकों के विरुद्ध विधिक दंडात्मक कार्रवाई की है।

यातायात निदेशालय (Traffic Headquarters) के डीजी अनिल पालीवाल के सीधे पर्यवेक्षण (Supervision) में संचालित इस महा-अभियान के बारे में विस्तृत सांख्यिकीय जानकारी देते हुए अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) डॉ. बी एल मीणा ने बताया कि इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य वाहनों में अवैध संरचनात्मक परिवर्तन (Illegal Modifications), अनधिकृत हूटर-बत्ती और प्रेशर हॉर्न के जरिए ध्वनि प्रदूषण व सड़कों पर रसूख का नंगा नाच करने वाले तत्वों की विधिक कमर तोड़ना है।

ब्लैक फिल्म और ‘जाति-पद’ सूचक नंबर प्लेटों पर विधिक प्रहार

राजस्थान पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विधिक विश्लेषण से साफ है कि प्रदेश में लोग सबसे ज्यादा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पुलिस की विशेष विडिंग विंग ने विभिन्न प्रकार के उल्लंघनों का जो सांख्यिकीय वर्गीकरण किया है, वह इस प्रकार है:

  • काली फिल्म (Top Violation): पूरे राज्य में सर्वाेच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर वाहनों के शीशों पर डार्क ब्लैक फिल्म लगाने वाले सबसे ज्यादा 3,264 वाहन चालकों के खिलाफ विधिक केस दर्ज कर मौके पर ही फिल्में उतरवाई गईं।
  • वीआईपी स्टाइल नंबर प्लेट: नियमावली के विपरीत और स्टाइलिश फोंट में नंबर प्लेट लगाने वाले 2,079 वाहन मालिक पुलिस के हत्थे चढ़े।
  • नाम-जाति का अवैध प्रदर्शन: अपनी निजी गाड़ियों के आगे या पीछे नंबर प्लेट और बॉडी पर अवैध रूप से अपना ‘प्रशासनिक पद’, ‘जाति’ या अन्य अनाधिकृत धौंस जमाने वाले शब्द लिखने वाले 1,204 लोगों के खिलाफ चालान फाड़े गए।
  • अवैध बॉडी मॉडिफिकेशन: बिना परिवहन विभाग (RTO) की अनुमति के गाड़ी की चेसिस को काटकर लंबा करने या बॉडी को मॉडिफाई कराने वाले 861 वाहनों को विधिक रूप से सीज या पाबंद किया गया है।

बत्तीबाजों और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली बुलेट्स पर कड़ा हंटर

सड़कों पर बेवजह हूटर बजाकर आम जनता को डराने और रौब झाड़ने वाले ‘बत्तीबाजों’ को भी पुलिस ने आड़े हाथों लिया है। राज्यभर में 544 ऐसे रसूखदार मामले सामने आए जहां निजी गाड़ियों पर अनाधिकृत रूप से लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर या तेज आवाज वाले हूटर लगे हुए थे, जिन्हें मौके पर ही उखाड़ फेंका गया। वहीं, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 496 प्रेशर हॉर्न और साइलेंसर बदलकर सड़कों पर पटाखे की आवाज (Firecracker Sound) उत्पन्न करने वाली हुड़दंगी बुलेट मोटरसाइकिलों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न विधिक धाराओं के तहत कड़ा एक्शन लिया गया है।

कार्रवाइयों का जिलावार सांख्यिकीय रिपोर्ट कार्ड

इस आठवें दिन के अभियान में विभिन्न जिलों की पुलिस इकाइयों के प्रदर्शन का तुलनात्मक सांख्यिकीय चार्ट नीचे स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है:

स्थान / जिला (Location)कुल दर्ज विधिक कार्रवाइयाँ (Total Actions)अभियान में विधिक रैंकिंग (Campaign Rank)
कोटा शहर (Kota City)572 कार्रवाइयाँप्रथम स्थान (Top Performer)
अजमेर (Ajmer)416 कार्रवाइयाँद्वितीय स्थान
बाड़मेर (Barmer)340 कार्रवाइयाँतृतीय स्थान
जयपुर शहर (Jaipur City)320 कार्रवाइयाँप्रमुख मेट्रो श्रेणी
चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh)311 कार्रवाइयाँविशेष जिला विंग
भरतपुर (Bharatpur)309 कार्रवाइयाँविशेष जिला विंग
भीलवाड़ा (Bhilwara)281 कार्रवाइयाँऔद्योगिक संभाग
जयपुर ग्रामीण (Jaipur Rural)247 कार्रवाइयाँग्रामीण बेल्ट
जोधपुर (Jodhpur)180 कार्रवाइयाँपश्चिमी संभाग

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा का संदेश: “कानून मानना केवल कानूनी दायित्व नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी”

इस व्यापक और रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई की समीक्षा के बाद महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने प्रदेश की सभी पुलिस कमिश्नरेट और जिला कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की विधिक पालना सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार के औचक और कड़े अभियान निरंतर जारी रखे जाएं।

डीजीपी ने आम जनता से भी अपील करते हुए कहा कि यातायात नियमों का पालन करना केवल चालान के डर से किया जाने वाला कोई कानूनी दायित्व नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक की एक बड़ी सामाजिक और विधिक जिम्मेदारी भी है। राजस्थान पुलिस का अंतिम विधिक उद्देश्य दंडात्मक राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि जनता में स्वेच्छा से नियमों को मानने की जागरूकता बढ़ाकर मरुधरा की सड़कों को सुरक्षित और अनुशासित बनाना है।

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