जयपुर । राजस्थान की सड़कों को सुरक्षित, अनुशासित और दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए राजस्थान पुलिस इन दिनों पूरी तरह से सिंघम और एक्शन मोड में नजर आ रही है। राजधानी जयपुर सहित राज्य के सभी 50 जिलों के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों, चौराहों और राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर यातायात पुलिस ने एक साथ व्यापक विशेष चेकिंग अभियान छेड़ दिया है। यह महा-अभियान 5 जून 2026 से शुरू होकर पूरे महीने यानी 30 जून 2026 तक लगातार जारी रहेगा। इस कड़े अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर विधिक अनुशासन कायम करना और नियमों को ठेंगे पर रखकर गाड़ियां दौड़ाने वाले रसूखदार, हुड़दंगी और लापरवाह वाहन चालकों को कड़ा विधिक संदेश देना है।
महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) डॉ. बी.एल. मीणा के सीधे पर्यवेक्षण में इस प्रदेशव्यापी अभियान का पूरा खाका तैयार किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभियान के प्रारंभिक 3 दिनों में पुलिस ने सीधे दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय एक जिम्मेदार मार्गदर्शक की भूमिका निभाई थी। इन 3 दिनों के दौरान वाहन चालकों, गैरेज स्वामियों और आम नागरिकों को नए नियमों, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) और अवैध मॉडिफिकेशन के गंभीर नुकसानों के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया था। लेकिन जैसे ही यह शुरुआती समझाइश का दौर समाप्त हुआ, पुलिस ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ धरातल पर ज़ीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए ताबड़तोड़ चालान और जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी।
पहले ही दिन 4,869 वाहनों पर भारी एक्शन, जानिए श्रेणीवार आंकड़े
एडीजी (यातायात) डॉ. बी.एल. मीणा ने अभियान के प्रथम दिन के आधिकारिक और सांख्यिकीय आंकड़े जारी करते हुए बताया कि राज्यभर के विभिन्न संभागों और जिलों में कुल 4869 वाहनों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने इस बार अपनी जांच और नाकेबंदी को मुख्य रूप से 6 ऐसी श्रेणियों में विभाजित किया है, जो आमतौर पर सड़क दुर्घटनाओं या सामाजिक व आपराधिक अशांति का मुख्य कारण बनती हैं।
इन आंकड़ों का श्रेणीवार विवरणात्मक चार्ट नीचे देखा जा सकता है:
| क्र.सं. | उल्लंघन की मुख्य श्रेणी (Violation Category) | पहले दिन दर्ज कुल मामले (No. of Cases) |
| 1. | काली फिल्म (Black Film) व अपारदर्शी शीशे | 2,246 मामले |
| 2. | नियम विरुद्ध, फर्जी या त्रुटिपूर्ण नंबर प्लेट | 1,372 मामले |
| 3. | अवैध संरचनात्मक परिवर्तन (Vehicle Modification) | 512 मामले |
| 4. | गाड़ी पर अनाधिकृत शब्द, जाति, धर्म या पद का लेखन | 313 मामले |
| 5. | अनाधिकृत बत्तियां, वीआईपी फ्लैशर और हूटर | 214 मामले |
| 6. | ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले प्रेशर और एयर हॉर्न | 212 मामले |
चेसिस, बॉडी या साइलेंसर बदला तो सीधे सीज़ होगी गाड़ी; युवाओं पर पैनी नजर
यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार के वाहन की मूल संरचना, बॉडी या चेसिस में ऐसा कोई भी बदलाव कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, जिससे उस वाहन के पंजीकरण प्रमाण-पत्र (RC) में दर्ज निर्माता कंपनी का मूल विवरण प्रभावित होता हो।
आजकल युवा वर्ग में अपनी मोटरसाइकिल या कार को आकर्षक बनाने के लिए उसके टायर निर्धारित मानक से ज्यादा चौड़े कराने, एक्स्ट्रा बॉडी किट लगाने, या गाड़ी के मूल आयामों में हेरफेर करने का एक नया और खतरनाक चलन देखा गया है, जो अब सीधे तौर पर भारी जुर्माने और जब्ती का कारण बन रहा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सीटिंग क्षमता, मूल रंग, आयाम अथवा निर्माता कंपनी द्वारा अनुमोदित विनिर्देशों से भिन्न कोई भी संरचनात्मक परिवर्तन पूरी तरह से अवैध माना जाएगा। विशेष रूप से बुलेट या अन्य हैवी बाइक्स में तेज आवाज करने वाले या पटाखे छोड़ने वाले साइलेंसर लगाने वालों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। ऐसे वाहनों को न केवल ‘ऑन-द-स्पॉट’ सीज़ किया जा रहा है, बल्कि गैरेज संचालकों को भी ऐसे मॉडिफिकेशन न करने की सख्त हिदायत दी जा रही है।
अनाधिकृत हूटर, फ्लैशर और प्रेशर हॉर्न मौके पर ही किए जाएंगे नष्ट
सड़कों पर बेवजह रौब झाड़ने या फर्जी वीआईपी दिखने की चाहत रखने वाले लोगों पर भी इस अभियान के तहत बड़ी चोट की जा रही है। किसी भी निजी या वाणिज्यिक वाहन पर सक्षम प्राधिकारी की लिखित और वैध अनुमति के बिना लाल या नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट, बीकन लाइट या हूटर लगाना अब जेल की हवा खिला सकता है। पुलिस टीमें नाकेबंदी के दौरान ऐसी अनाधिकृत बत्तियों और तेज ध्वनि वाले प्रेशर हॉर्न या एयर हॉर्न को वाहनों से मौके पर ही मैकेनिक की मदद से उतरवा रही हैं और उन्हें ज़ब्त कर मौके पर ही नष्ट करने की प्रक्रिया अपना रही हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस भी होगा 3 महीने के लिए अयोग्य
यातायात विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये तेज ध्वनि उपकरण और फ्लैशर लाइटें न केवल गंभीर ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती हैं, बल्कि रात के समय सामने से आ रहे अन्य निर्दोष वाहन चालकों की आंखों को चौंधियाकर भयानक सड़क हादसों को भी आमंत्रण देती हैं। इस बार केवल आर्थिक जुर्माना (चालान) करके वाहनों को नहीं छोड़ा जा रहा है, बल्कि संबंधित वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) तुरंत तीन महीने के लिए निलंबित करने या गंभीर मामलों में उसे स्थायी रूप से निरस्त करने की विधिक कार्रवाई भी साथ-साथ अमल में लाई जा रही है।
नियमों की अनदेखी पर सीधे गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होगा सस्पेंड
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) को लेकर भी परिवहन विभाग इस जून महीने में बेहद सख्त रुख अख्तियार किए हुए है। विभाग ने सभी पुराने और नए वाहन स्वामियों को अनिवार्य रूप से अधिकृत केंद्रों से एचएसआरपी प्लेट लगवाने के निर्देश दिए हैं। चेकिंग के दौरान यदि किसी वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट, अस्पष्ट या अपठनीय नंबर, अथवा नंबर प्लेट को किसी स्टिकर या कपड़े से ढंका हुआ पाया जाता है, तो उसे बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध (Forgery) माना जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे वाहन का चालान बनाने के साथ-साथ गाड़ी को तुरंत जब्त करें और परिवहन कार्यालय (RTO) को उस वाहन का पंजीकरण (Registration) स्थायी या अस्थायी रूप से निलंबित करने की सख्त रिपोर्ट भेजें।
सुस्त जिलों के कप्तानों (SPs) को पुलिस मुख्यालय से कड़े निर्देश
अभियान के पहले ही दिन राजस्थान के अधिकांश प्रमुख जिलों जैसे जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर में यातायात पुलिस की बेहद प्रभावी और धरातल पर दिखने वाली सक्रियता दर्ज की गई है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय (PHQ) के सांख्यिकीय विश्लेषण में यह बात भी सामने आई है कि कुछ सुदूरवर्ती या छोटे जिलों में प्रवर्तन की कार्रवाई की गति पहले दिन अपेक्षाकृत थोड़ी कम रही। इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए डीजीपी कार्यालय ने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों (SPs) को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
डॉ. बी.एल. मीणा ने स्पष्ट किया है कि यह कोई एक या दो दिन की सांकेतिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि सुशासन और सड़क सुरक्षा की दिशा में पूरे जून महीने तक चलने वाला एक सुव्यवस्थित ढांचागत सुधार अभियान है, जिसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।