वन विभाग के 5 वर्षीय बजट प्रावधान का ठेकेदारों और अफसरों ने मिलकर किया खेल

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान के वन विभाग में पौधारोपण योजनाओं को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. प्रारंभिक जांच में मिले इनपुट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में चलाए गए वृक्षारोपण अभियानों के नाम पर 100 करोड़ रुपए से अधिक के सरकारी बजट का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया है. घोटाले का तरीका यह था कि कागजों पर ही लाखों पौधे लगा दिए गए और बिना धरातल पर काम हुए ही पूरा भुगतान उठा लिया गया. मामले की भीषण गंभीरता को देखते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने इसके कड़े जांच के निर्देश दिए हैं और विभागीय स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, करौली, बांसवाड़ा, झालावाड़, कोटा, बाड़मेर, जैसलमेर, भीलवाड़ा, जालौर, सिरोही, डूंगरपुर, अजमेर और चूरू समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में पौधारोपण कार्यों को रिकॉर्ड में तो बहुत शानदार दर्शाया गया था. लेकिन, जब विभागीय सतर्कता टीम ने मौके पर जाकर जमीनी हकीकत देखी, तो कई स्थानों पर न तो गड्ढे खोदे जाने के कोई प्रमाण मिले और न ही वहां कभी कोई पौधारोपण किए जाने के निशान दिखाई दिए. सीधे तौर पर आरोप है कि विभागीय उच्च अधिकारियों, स्थानीय फील्ड कर्मचारियों और चहेते ठेकेदारों की मिलीभगत से यह फर्जी कागजी रिकॉर्ड तैयार कर जनता के टैक्स के पैसे का बंदरबांट किया गया.

अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उदयशंकर के हाथ में जांच की कमान

इस महा-घोटाले की परतों को खोलने के लिए वर्तमान में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) उदयशंकर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) काम कर रही है. यह विभागीय टीम लगातार अलग-अलग जिलों के संवेदनशील वन क्षेत्रों में जाकर सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक जमीनी स्थिति का बारीकी से मिलान कर रही है.

अब तक की जांच में कई स्तरों पर गंभीर वित्तीय विसंगतियों और धोखाधड़ी के पुख्ता संकेत मिले हैं. जांच अधिकारियों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले किसी भी स्तर के कर्मचारी, अधिकारी या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा. इसके साथ ही, मामले के कानूनी पहलुओं और व्यापकता को देखते हुए इसे आगे की सघन जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को भी सौंपने पर उच्च स्तर पर विचार किया जा रहा है.

इस तरह होता था काली कमाई का खेल: समझिए 5 वर्ष का बजट गणित

वन विभाग की नियमावली और प्रशासनिक योजनाओं के अनुसार, रोपे जाने वाले प्रत्येक पौधे की सुरक्षा और उत्तरदायित्व के लिए सरकार द्वारा पूरे पांच वर्ष तक चरणबद्ध बजट का प्रावधान किया जाता है.

  • पहले वर्ष में: जमीन को चिह्नित कर गड्ढे खोदने, क्षेत्र का माइक्रोप्लान तैयार करने और नर्सरी से पौधों की सुचारू व्यवस्था के लिए शुरुआती राशि दी जाती है.
  • दूसरे वर्ष में: वास्तविक पौधारोपण करने और पौधों को निर्धारित वन स्थलों तक सुरक्षित पहुंचाने पर सरकारी बजट खर्च होता है.
  • तीसरे वर्ष में: पौधों के रख-रखाव, खाद-पानी और जो पौधे खराब या सूख गए हैं, उनके स्थान पर नए पौधे लगाने (कैजुअल्टी रिप्लेसमेंट) का कड़ा प्रावधान है.
  • चौथे और पांचवें वर्ष में: पौधों की निरंतर देखरेख, ट्री-गार्ड और सुरक्षात्मक उपायों के लिए बजट जारी किया जाता है.

कथित तौर पर भ्रष्टाचार के सिंडिकेट ने इसी 5 वर्षीय देखरेख व्यवस्था की जटिलताओं का नाजायज फायदा उठाया और बिना पौधे लगाए ही पांचों साल का बजट कागजों में ठिकाने लगा दिया.

भ्रष्टाचार पर फुलस्टॉप लगाने को जियो-टैगिंग और AI की एंट्री

भविष्य में पौधारोपण के नाम पर होने वाली ऐसी शर्मनाक गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए वन विभाग ने एक अभेद्य और नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है. अब प्रदेश में लगने वाले प्रत्येक सरकारी पौधे की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) को पूरी तरह अनिवार्य बना दिया गया है.

इसके तहत पौधारोपण स्थल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड, उसकी सटीक भू-स्थानिक जानकारी (Geospatial Data) और लाइव अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) के साथ फोटो विभागीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इसके अलावा, घने जंगलों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सैटेलाइट निगरानी प्रणाली और विशेष रूप से तैयार किए गए “हरियालो ऐप” के उपयोग को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि उच्च अधिकारी कार्यालय में बैठकर ही पौधारोपण गतिविधियों की वास्तविक समय (Real-Time) में मॉनिटरिंग कर सकें.

दो IFS अधिकारियों सहित पांच पर गिर चुकी है निलंबन की गाज

वन विभाग के गलियारों में इस जांच के बाद से हड़कंप मचा हुआ है. गौरतलब है कि अब तक की गई शुरुआती दंडात्मक कार्रवाई में विभाग द्वारा दो वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों, दो सहायक वन संरक्षकों (ACF) और तीन क्षेत्रीय वन अधिकारियों (RFO) को गंभीर लापरवाही और संलिप्तता के आरोप में निलंबित किया जा चुका है.

वहीं, अलवर जिले में सामने आए करीब 18 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की प्रकृति को बेहद गंभीर मानते हुए राज्य सरकार द्वारा इसकी सीबीआई (CBI) जांच कराने की मजबूत सिफारिश भी केंद्र को भेजी जा चुकी है. जैसे-जैसे उदयशंकर की टीम

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