Rajasthan Litigation Policy 2026: सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, अब कोर्ट नहीं विभाग में होगा समस्याओं का समाधान

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राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भजनलाल सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर चुकी है। विधि विभाग ने ‘नई लिटिगेशन पॉलिसी-2026’ का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की विभागीय समस्याओं (जैसे पेंशन, वेतन विसंगति, पदोन्नति) का समाधान विभाग के स्तर पर ही करना है, ताकि उन्हें अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।

3-स्तरीय कमेटियां: कैसे होगा आपकी समस्या का समाधान?

नई व्यवस्था के तहत हर विभाग में तीन स्तरों पर सुनवाई का तंत्र विकसित किया जाएगा:

  1. विभागाध्यक्ष (HOD) स्तर: सबसे पहले मामला संबंधित विभाग के प्रमुख के पास जाएगा। यदि समस्या उनके अधिकार क्षेत्र में है, तो वहीं निपटारा होगा।
  2. विभाग स्तर (शासन सचिव): यदि HOD स्तर पर बात नहीं बनी, तो शासन उप सचिव या शासन सचिव स्तर की कमेटी मामले को नियमों के तहत सुलझाएगी।
  3. मुख्य सचिव (CS) स्तर: भ्रष्टाचार या अति-गंभीर मामलों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी अंतिम निर्णय लेगी।

नोडल अधिकारी: कानूनी पेंच सुलझाने के एक्सपर्ट

प्रत्येक विभाग में जिला और राज्य स्तर पर ‘कानूनी पृष्ठभूमि’ वाले सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

  • काम: ये अधिकारी कोर्ट में चल रहे मामलों की निगरानी करेंगे, समय पर जवाब दाखिल करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विभाग की देरी के कारण किसी कर्मचारी का हक न अटके।

समय सीमा का कड़ा अनुशासन

पॉलिसी लागू होने के 14 दिन के भीतर कमेटियों का गठन अनिवार्य होगा। शिकायत मिलने के 7 दिन के भीतर कार्रवाई शुरू करनी होगी और 30 दिन के भीतर अपनी सिफारिश उच्चाधिकारियों को भेजनी होगी। इससे सालों से लंबित फाइलों को रफ़्तार मिलेगी।

क्यों पड़ी इस पॉलिसी की जरूरत?

वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा मामले रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन और सेवा लाभों से जुड़े होते हैं। इसमें भी शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग अव्वल हैं। अधिकारियों के समय पर जवाब न देने या कोर्ट में पेश न होने पर ‘न्यायिक अवमानना’ (Contempt) के मामले बढ़ते हैं। नई पॉलिसी से:

  • कोर्ट और विभागों में लंबित मुकदमों का बोझ कम होगा।
  • अधिकारियों का कीमती समय बचेगा, जो अब जनसेवा में लग सकेगा।
  • कर्मचारियों को बिना पैसा और समय खर्च किए ‘त्वरित न्याय’ मिलेगा।

स्वायत्तशासी संस्थाओं को भी बड़ी सौगात

2018 की पुरानी पॉलिसी में केवल सरकारी विभाग शामिल थे, लेकिन 2026 की नई पॉलिसी में स्वायत्तशासी संस्थाओं (जैसे- राजस्थान विश्वविद्यालय, हिंदी ग्रंथ अकादमी, विभिन्न बोर्ड और सहकारी समितियां) को भी शामिल किया गया है। इससे इन संस्थाओं के हजारों कर्मचारियों को भी अब कानूनी विवादों में विभागीय संरक्षण मिल सकेगा।


V. ‘लिटिगेशन पॉलिसी-2026’ का एक्शन प्लान

चरणसमय सीमामुख्य उत्तरदायित्व
कमेटी गठननोटिफिकेशन के 14 दिन के भीतरसभी सरकारी एवं स्वायत्तशासी विभाग
कार्रवाई की शुरुआतशिकायत मिलने के 07 दिन के भीतरनोडल अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष
अंतिम सिफारिश30 दिन के भीतरविभाग स्तरीय कमेटी
समीक्षाहर 15 दिन मेंनोडल अधिकारी द्वारा मामलों की ट्रैकिंग

VI. एक्सपर्ट कमेंट्स (Expose Now Analysis)

“यह पॉलिसी ‘प्री-लिटिगेशन’ स्टेज पर ही विवादों को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर विभाग संवेदनशील होकर कर्मचारी की बात सुन ले, तो 80% केस कोर्ट पहुँचेंगे ही नहीं।”

प्रतीक कासलीवाल, लीगल एक्सपर्ट

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