राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक मानवीय और बाल-केंद्रित (Child-Centric) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। हाईकोर्ट के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा की पहल पर एक विशेष सर्कुलर जारी किया गया है, जिसके तहत अब पॉक्सो (POCSO) कोर्ट और जेजे (जुवेनाइल जस्टिस) बोर्ड में जज, वकील और लोक अभियोजक कोर्ट की पारंपरिक ‘काले कोट’ वाली यूनिफॉर्म में नजर नहीं आएंगे।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि कोर्ट का सख्त औपचारिक माहौल और वकीलों का काला कोट अक्सर बच्चों के मन में डर, घबराहट या असहजता पैदा कर देता है।
- खुलकर बात कर सकेंगे बच्चे: जब बच्चा डर के साये में होता है, तो वह अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाता।
- संवेदनशील वातावरण: पॉक्सो और जेजे एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य बच्चे को न्याय दिलाना और उसके पुनर्वास में मदद करना है। सादा पहनावा इस प्रक्रिया को अधिक सहज बनाएगा।
कैसा होगा नया ‘ड्रेस कोड’?
सर्कुलर के अनुसार, संबंधित कोर्ट में कार्यरत न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता अब अदालत की गरिमा को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित परिधान पहन सकेंगे:
- सादा, औपचारिक और संयमित पहनावा।
- सफेद शर्ट और साधारण पैंट।
- भारी गाउन या काले कोट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
राजस्थान के 100 कोर्ट में तत्काल प्रभाव से लागू
हाईकोर्ट प्रशासन का यह आदेश प्रदेश की सभी संबंधित अदालतों पर लागू होगा:
| कोर्ट का प्रकार | संख्या | स्थिति |
| पॉक्सो कोर्ट (POCSO) | 64 | तत्काल प्रभाव से लागू |
| जेजे बोर्ड (JJ Board) | 36 | तत्काल प्रभाव से लागू |
| कुल अदालतें | 100 | सर्कुलर डीजे को प्रेषित |
कानूनी विशेषज्ञों ने सराहा: “अन्य राज्यों के लिए उदाहरण”
आपराधिक मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक चौहान ने इस निर्णय को बच्चों के हित में एक ‘सकारात्मक सर्जिकल स्ट्राइक’ बताया है। उनका कहना है कि इससे न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं, अधिवक्ता अभिषेक पाराशर और विकास सोमानी का मानना है कि राजस्थान की यह पहल पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगी और इससे बच्चों के बयान अधिक निष्पक्ष और स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किए जा सकेंगे।
अदालती गरिमा और मानवीय संवेदना का संगम
हाईकोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल वातावरण को अनुकूल बनाने के लिए है। अदालत की गरिमा और अनुशासन पहले की तरह ही बना रहेगा, लेकिन यह नया ‘सॉफ्ट लुक’ बच्चों को यह अहसास कराएगा कि वे किसी डरावनी जगह पर नहीं, बल्कि न्याय की सुरक्षित चौखट पर हैं।