शिक्षा विभाग में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: प्रवेशोत्सव के पहले ही दिन सांगानेर CBEO ने रोकी नामांकन की रफ्तार

राजस्थान के शिक्षा महकमे में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। जब पूरा प्रदेश ‘प्रवेशोत्सव 2026-27’ के जरिए सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने का ढिंढोरा पीट रहा है, तब धरातल पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी ही इस अभियान की जड़ों में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री सीताराम जाट के सांगानेर और चाकसू क्षेत्र के हालिया तूफानी दौरे ने यह साफ कर दिया है कि विभाग के भीतर ‘सब कुछ ठीक नहीं है’।

सांगानेर CBEO की ‘बैठक’ वाली साजिश बेनकाब

हैरानी की बात यह है कि जिस दिन (27 मार्च) प्रवेशोत्सव का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होना था, उसी दिन सांगानेर ग्रामीण के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) ने सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक बैठक बुला ली। निदेशक ने इसे विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना और अभियान को ठप करने की साजिश माना है। निदेशक ने CBEO के निलंबन और 16-CCA के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश देकर स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी अभियानों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

वाटिका और तितरिया: स्कूल से ‘गायब’ मिला अनुशासन

निदेशक जब राउमावि वाटिका पहुँचे, तो वहाँ अव्यवस्थाओं का अंबार मिला। प्रधानाचार्य श्रीमती सारिका सिंघल मौके से नदारद थीं और स्टाफ को ‘प्रवेशोत्सव’ की जानकारी तक नहीं थी। लापरवाही की हद तो तब हो गई जब स्कूल के 4 शिक्षक अन्य कामों का बहाना बनाकर गायब मिले। वहीं, तितरिया स्कूल में प्रवेशोत्सव के नाम पर एक कागज तक नहीं हिला था, जिसके बाद प्रधानाचार्य श्रीमती शशिबाला के खिलाफ 17-CCA की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

कुम्हारियावास: ‘ड्यूटी चोरी’ पर बड़ी कार्रवाई

चाकसू के राउमावि कुम्हारियावास में निदेशक ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया। यहाँ दो पंचायत सहायक लंबे समय से ‘BLO ड्यूटी’ का बहाना बनाकर स्कूल से गायब थे, जबकि धरातल पर उनका कोई काम नहीं दिख रहा था। निदेशक ने तुरंत दोनों को निलंबित करने और आदेशों की अवहेलना करने वाले शिक्षक गिरिराज साहू पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए।

लाइव सच

का विश्लेषण: शिक्षा निदेशक की यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ उन अधिकारियों के लिए बड़ी चेतावनी है जो एसी कमरों में बैठकर सरकार के प्रमुख अभियानों को केवल कागजों तक सीमित रखना चाहते हैं। अब देखना यह है कि क्या शासन स्तर पर इन लापरवाह अधिकारियों पर स्थायी गाज गिरती है या फिर रसूख के चलते फाइल ठंडे बस्ते में चली जाती है।

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