राजस्थान में भाजपा सरकार के गठन के बाद से ही कार्यकर्ता और नेता जिस घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वह है ‘राजनीतिक नियुक्तियां’। सोमवार को भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बयानों ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। जयपुर से लेकर सीकर तक राजनीतिक गलियारों में अब एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर यह इंतजार कब खत्म होगा?
12 हजार कार्यकर्ताओं को ‘एडजस्टमेंट’ की आस
एक मोटे अनुमान के अनुसार, प्रदेश में विभिन्न बोर्ड, निगमों, आयोगों और यूआईटी (UIT) में लगभग 12 हजार से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किया जा सकता है। वर्तमान में 110 से अधिक बोर्ड-निगमों और आयोगों के साथ-साथ यूआईटी अध्यक्षों के पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्ति पाकर कई बड़े नेताओं को सरकार में ‘मंत्री स्तर’ का दर्जा मिलने की उम्मीद है।
इतिहास में भी देरी का रहा है ट्रेंड
राजस्थान के राजनीतिक इतिहास को देखें तो ज्यादातर सरकारों में 10-12 प्रमुख बोर्डों को छोड़कर शेष नियुक्तियां सरकार बनने के दो से ढाई साल बाद ही की जाती हैं। पार्टियां अक्सर स्थानीय चुनावों के समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियों को भांपकर ही ये नियुक्तियां करती हैं। वर्तमान में भी सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि शीर्ष नेतृत्व रणनीतिक कारणों से इसे टालता नजर आ रहा है।
अब तक मात्र 9 पदों पर हुई नियुक्ति
हैरानी की बात यह है कि 110 से अधिक संस्थानों में से अब तक केवल 9 बोर्ड-आयोगों में ही अध्यक्षों की नियुक्ति हो सकी है। हाल ही में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अरुण चतुर्वेदी की नियुक्ति सबसे आखिरी बड़ी घोषणा थी। वर्तमान में लोकायुक्त का पद भी रिक्त चल रहा है।
इन प्रमुख बोर्डों में नियुक्तियां हो चुकी हैं:
- देवनारायण बोर्ड, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड, किसान आयोग, राज्य वित्त आयोग, सैनिक कल्याण बोर्ड, धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण।
ये बड़े विभाग अब भी खाली
सरकार के कई महत्वपूर्ण अंग अभी भी बिना मुखिया के काम कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE)
- पर्यटन विकास निगम (RTDC)
- राजस्थान आवासन मंडल (Housing Board)
- महिला आयोग और अल्पसंख्यक आयोग
- युवा बोर्ड और राज्य खेल परिषद्
एक नजर में स्थिति
| श्रेणी | विवरण |
| कुल संस्थाएं | 110 से अधिक (बोर्ड, निगम, आयोग, यूआईटी) |
| रिक्त पद | 100 से ज्यादा प्रमुख पद अभी भी खाली |
| अब तक नियुक्तियां | मात्र 9 संस्थानों में |
| कुल संभावित कार्यकर्ता | 12,000+ (विभिन्न स्तरों पर) |