जयपुर। राजस्थान के आम उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से घोषित ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ फिलहाल फाइलों और बैठकों के दौर में उलझी हुई है। भजनलाल सरकार ने अपने बजट 2025-26 में प्रदेश की 5,000 राशन की दुकानों को ‘बहुउद्देशीय अन्नपूर्णा भंडार’ के रूप में विकसित करने का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दो साल की चर्चाओं के बाद भी जनता को सस्ती दाल, तेल और मसालों का इंतजार है।

विभागीय नवाचार बनाम बाजार की प्रतिस्पर्धा: क्यों हो रही है देरी?
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार, इस बार योजना को नए स्वरूप में लागू करने की तैयारी है, लेकिन बदलता वक्त सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। मंत्री का मानना है कि आज गांवों में भी युवाओं ने आधुनिक स्टोर और स्टार्टअप खोल लिए हैं, जिससे सरकारी भंडारों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है।
पहले की तुलना में अब लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है और ब्रांड्स के प्रति रुझान भी बदला है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह निजी व्यापारियों और ई-कॉमर्स के दौर में ऐसी दरें और गुणवत्ता कैसे प्रदान करे, जिससे उपभोक्ता राशन की दुकानों की ओर आकर्षित हों। विभाग फिलहाल दाल, चीनी, चावल और मसालों के साथ-साथ मल्टीनेशनल एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की लिस्टिंग पर काम कर रहा है।
टेंडर प्रक्रिया और राशन डीलरों का विरोध: फंसा है पेच
योजना के धरातल पर न उतर पाने का एक बड़ा कारण राशन डीलरों और सरकार के बीच का टकराव है। सरकार ने हाल ही में निर्माताओं और एग्रीगेटर्स के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किए हैं, लेकिन डीलरों का सहयोग मिलना अभी बाकी है। डीलरों की मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:
- कम कमीशन: डीलरों का कहना है कि वर्तमान राशन वितरण का कमीशन पहले ही कम है, ऐसे में अतिरिक्त उत्पादों की जिम्मेदारी लेना घाटे का सौदा हो सकता है।
- रजिस्ट्रेशन शुल्क का मुद्दा: अन्नपूर्णा भंडार के लिए मांगे गए 2,500 रुपये के आवेदन शुल्क को डीलरों ने अनुचित बताया है। कई डीलरों का पैसा पहले के पंजीकरणों के नाम पर विभाग के पास फंसा हुआ है।
- कठिन बुनियादी ढांचा शर्तें: सरकार ने नियम रखा है कि दुकान कम से कम 200 वर्गफीट की होनी चाहिए और 30 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित होनी चाहिए। राजस्थान के पुराने ग्रामीण क्षेत्रों और तंग गलियों में स्थित राशन की दुकानों के लिए इन शर्तों को पूरा करना एक बड़ी बाधा है।
- सियासी सफर: बीजेपी की योजना, कांग्रेस में ब्रेक और अब फिर वापसी
अन्नपूर्णा भंडार योजना का सफर राजस्थान की सियासत की तरह ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2015 में बीजेपी सरकार ने इसे पीपीपी मॉडल पर शुरू किया था, जिसे 2018 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने प्रबंधन की कमी बताकर बंद कर दिया। इसके स्थान पर गहलोत सरकार ने ‘फ्री राशन किट’ योजना शुरू की, जो चुनाव के बाद बंद हो गई।
अब वर्तमान सरकार इसे फिर से जीवित करने का प्रयास कर रही है, ताकि डीलरों की आय भी बढ़े और आमजन को रियायती दरों पर ब्रांडेड सामान मिले। खाद्य विभाग अब 3 फरवरी 2026 को होने वाली बड़ी बैठकों और हालिया टेंडर प्रक्रिया के जरिए इस योजना को ‘ऑटोमोड’ पर लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि भ्रष्टाचार कम हो और पारदर्शिता बढ़े।