राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई की रफ्तार का हाल खुद ब्यूरो के आंकड़े ही बयां कर रहे हैं। पिछले तीन सालों में ‘अमीर अफसरों’ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) के 73 केस दर्ज किए गए, लेकिन न्याय की चौखट यानी कोर्ट तक केवल एक मामला ही पहुँच पाया है। बाकी की फाइलें जांच, रिकॉर्ड मिलान और मंजूरी के चक्रव्यूह में उलझी हुई हैं।
आंकड़ों की जुबानी, सिस्टम की कहानी (जनवरी 2023 – दिसंबर 2025):
- कुल दर्ज मामले: 73
- जांच अधिकारियों के पास लंबित: 65 केस (करीब 90%)
- कोर्ट में पेश चालान: मात्र 01 मामला
- अभियोजन स्वीकृति का हाल: एसीबी ने 8 प्रस्ताव भेजे, जिनमें से केवल 5 में ही मंजूरी मिली है।
दो चर्चित मामले: करोड़ों का कैश, पर जांच अब भी शेष
केस-1: डीओआईटी (DoIT) की अलमारी से मिला खजाना 20 मई 2023 को एसीबी ने तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उनके कार्यालय की अलमारी से 2.31 करोड़ रुपये नकद और 1 किलो सोने का बिस्किट बरामद हुआ था। ताज्जुब की बात यह है कि इतना ठोस सबूत होने के बावजूद इस मामले की जांच आज भी जारी है।
केस-2: जब रक्षक ही निकला भक्षक
जुलाई 2025 में एसीबी ने अपने ही विभाग के एएसपी जगराम मीणा (झालावाड़ चौकी) के खिलाफ केस दर्ज किया। जगराम के पास से सवा नौ लाख रुपये बरामद हुए थे। आरोपी ने इसे किसी अन्य व्यक्ति (वृंदावन शर्मा) का पैसा बताया, लेकिन क्रॉस सवालों में वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।