गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक रामनिवास बाग (सावन-भादो पार्क) से रियासतकालीन चंदन के पेड़ों की चोरी के मामले में अब भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कैग ने अपनी ताजा ऑडिट रिपोर्ट में इस पूरी घटना को प्रशासन की ‘लीपापोती’ करार देते हुए जिम्मेदारों से 90 लाख रुपए की वसूली और सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
30 गार्ड्स की मौजूदगी में कैसे हुई चोरी?
कैग की रिपोर्ट में सिस्टम की मिलीभगत पर तल्ख टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने सुरक्षा का जिम्मा ‘सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड’ को दिया था।
- 7 महीने में दो बार चोरी: पहली घटना जुलाई 2019 में हुई (दो पेड़) और दूसरी जनवरी 2020 में (एक पेड़)।
- सुरक्षा घेरा: हैरानी की बात यह है कि मौके पर सुपरवाइजर सहित 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, फिर भी तस्कर 60 साल पुराने भारी पेड़ों को काटकर ले जाने में सफल रहे।
दोषी एजेंसी पर कार्रवाई के बजाय ‘मेहरबानी’
अनुबंध की शर्तों के अनुसार, यदि सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में चोरी होती है, तो नुकसान की भरपाई एजेंसी को करनी थी। साथ ही संतोषजनक काम न होने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान था। लेकिन जेडीए ने:
- गंभीर शिकायतों के बावजूद एजेंसी का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया।
- अतिरिक्त आयुक्त और वन संरक्षक की जांच रिपोर्टों को दबाए रखा, जिसमें एजेंसी और जेडीए इंस्पेक्टर को स्पष्ट रूप से दोषी माना गया था।
“सावन-भादो पार्क से कीमती चंदन के पेड़ चोरी होना और फिर भी उसी एजेंसी का ठेका बढ़ाते रहना स्पष्ट करता है कि सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत थी।” — कैग ऑडिट रिपोर्ट (अंश)
90 लाख का गणित और वसूली का आदेश
वन संरक्षक और जेडीए के सीनियर हॉर्टिकल्चरिस्ट की रिपोर्ट के आधार पर:
- एक 60 साल पुराने चंदन के पेड़ की कीमत करीब 30 लाख रुपए आंकी गई है।
- चोरी हुए तीनों पेड़ों की कुल कीमत 90 लाख रुपए होती है।
- कैग ने अब यह पूरी राशि सिक्योरिटी एजेंसी से वसूलने और उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा है जिन्होंने जांच को ठंडे बस्ते में डाले रखा।
भ्रष्टाचार की बू: नियमों की सरेआम धज्जियां
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि सुरक्षाकर्मियों पर पार्क में आने वाले नागरिकों से अवैध वसूली के आरोप थे। 27 अक्टूबर 2021 की जांच रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की सिफारिश के बावजूद जेडीए ने चुप्पी साधे रखी। अब कैग के इस हस्तक्षेप के बाद जेडीए प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।