Jaipur UD Tax Recovery: जयपुर नगर निगम ने वसूले ₹186 करोड़, वसूली के ‘तरीकों’ पर उठे गंभीर सवाल

Desk

जयपुर नगर निगम के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 राजस्व के लिहाज से ऐतिहासिक रहा है। निगम ने इस वर्ष कुल ₹186 करोड़ का यूडी टैक्स (Urban Development Tax) वसूला है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब ₹35 करोड़ अधिक है। हालांकि, इस रिकॉर्ड तोड़ वसूली के पीछे ‘टारगेट’ पूरा करने का दबाव और अधिकारियों की कथित मनमानी की कई खौफनाक कहानियां भी सामने आई हैं।

जोनवार रिपोर्ट: मालवीय नगर ‘सुपरफास्ट’, आमेर ‘फिसड्डी’

निगम की जोनवार रिपोर्ट के अनुसार, मालवीय नगर जोन टैक्स वसूली में नंबर 1 पर रहा है, जबकि आमेर-हवामहल जोन सबसे निचले पायदान पर है।

जोन का नामवसूली (करोड़ रुपये में)स्थान
मालवीय नगर₹53.68प्रथम (1st)
सिविल लाइंस₹27.70द्वितीय (2nd)
मानसरोवर₹15.84तृतीय (3rd)
झोटवाड़ा₹15.79चतुर्थ (4th)
आमेर-हवामहल₹5.43सबसे पीछे

नियमों की धज्जियां और ‘जबरन’ वसूली के आरोप

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के स्पष्ट नियम हैं कि यूडी टैक्स केवल 300 वर्गगज से बड़ी आवासीय और 100 वर्गगज से बड़ी वाणिज्यिक संपत्तियों पर ही लागू होता है। इसके बावजूद, फील्ड में तैनात अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं:

  1. एरिया का फर्जीवाड़ा: ब्रह्मपुरी और आमेर रोड क्षेत्रों में 90 वर्गगज के प्लॉट को कागजों में 500 वर्गगज दिखाकर भारी-भरकम टैक्स नोटिस थमा दिए गए।
  2. इंसानियत ताक पर: सांगानेर में रेलवे स्टेशन रोड पर एक दुकान को सील कर दिया गया, जबकि अंदर लोग मौजूद थे। भारी विरोध के बाद निगम को कदम पीछे खींचने पड़े।
  3. गलत नोटिस: मुरलीपुरा में कृषि भूमि पर ₹27 लाख और जगतपुरा में एक नर्सरी को ₹18 लाख का बकाया बताकर सीलिंग की कार्रवाई की गई।

₹250 करोड़ का ‘पहाड़’ अभी भी बाकी

रिकॉर्ड वसूली के बावजूद अधिकारियों का कहना है कि शहर में लगभग ₹200 से ₹250 करोड़ का यूडी टैक्स अब भी बकाया है। निगम का मानना है कि यदि यह पूरी राशि वसूल हो जाए, तो शहर के विकास कार्यों को एक नई गति मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि विकास के लिए वसूली जरूरी है, लेकिन वह नियमों के दायरे में और मानवीय होनी चाहिए।


V. क्या कहता है नियम? (UD Tax Rules)

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009:

  • आवासीय: 300 वर्गगज से अधिक क्षेत्रफल पर।
  • वाणिज्यिक: 100 वर्गगज से अधिक क्षेत्रफल पर।
  • छूट: मंदिर, सार्वजनिक स्थान और सरकार द्वारा अधिसूचित कुछ श्रेणियों को छूट।

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