जयपुर के खो नागोरियान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड

Madhu Manjhi

जयपुर। राजधानी जयपुर के खो नागोरियान थाना इलाके में मंगलवार दोपहर के समय एक वैध/अवैध पटाखा निर्माण फैक्ट्री में अचानक लगी भीषण और विहंगम आग ने समूचे प्रशासनिक महकमे और स्थानीय जनता में हड़कंप मचा दिया है। आग की लपटें इतनी तीव्र और भयावह थीं कि फैक्ट्री के भीतर दैनिक मजदूरी का कार्य कर रहे असहाय मजदूरों को संभलने और बाहर भागने तक का विधिक मौका नहीं मिल सका। चूंकि यह एक पटाखा विनिर्माण इकाई है, इसलिए आग की पहली चिंगारी भड़कते ही भीतर भारी मात्रा में संचित कच्चे बारूद और तैयार पटाखों के बक्सों में सिलसिलेवार और अत्यंत तीव्र धमाके होने शुरू हो गए। इन धमाकों की गूंज और आसमान को छूते घने काले धुएं के गुबार की वजह से समूचे खो नागोरियान क्षेत्र में दहशत फैल गई और स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते देखे गए।

घटना की विधिक सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस, आपदा प्रबंधन की गाड़ियां, आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाएं और मुख्य अग्निशमन केंद्र से दमकल की गाड़ियां पानी के टैंकरों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। शुरुआत में लगातार हो रहे बारूद के धमाकों के कारण बचाव दल को परिसर के भीतर विधिक रूप से दाखिल होने में भारी और जानलेवा मशक्कत का सामना करना पड़ा।

दीवारें तोड़कर बनाया वेंटिलेशन; 3 श्रमिक गंभीर रूप से झुलसे

इस अग्निकांड का सबसे दर्दनाक और चिंताजनक पहलू वहां काम करने वाले श्रमिकों की जीवन सुरक्षा को लेकर बना हुआ है। प्रारंभिक इनपुट के मुताबिक, जब दोपहर के समय यह हादसा हुआ, तब फैक्ट्री के भीतर स्थानीय स्तर के साथ-साथ कई प्रवासी मजदूर भी बारूद की फिलिंग और पैकिंग के काम में व्यस्त थे। देखते ही देखते आग ने पूरी दो मंजिला बिल्डिंग को अपने आगोश में ले लिया।

भीतर फंसे श्रमिकों की जान बचाने के लिए खो नागोरियान पुलिस और स्थानीय जांबाज युवाओं की मदद से फैक्ट्री के पिछले हिस्से की पक्की कंक्रीट की दीवारों को कटर और हथौड़ों से विधिक रूप से तोड़कर वेंटिलेशन (रास्ता) बनाया गया। धुएं के भीषण गुबार के बीच से अब तक 3 गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों को बेहद नाजुक हालत में बाहर निकाला गया है, जिन्हें तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल की इमरजेंसी के बर्न वार्ड (Burn Ward) में विधिक रूप से भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनकी जान बचाने में जुटे हैं।

हादसे का सांख्यिकीय और प्रशासनिक विवरण

धमाकों और आग की विभीषिका पर काबू पाने के लिए कलेक्ट्रेट और नागरिक सुरक्षा विंग द्वारा ग्राउंड पर निम्नलिखित विधिक और सांख्यिकीय बल तैनात किया गया है:

  • धुएं का दायरा: हादसे के बाद हवा में उठे जहरीले काले धुएं का गुबार करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर के रिहायशी इलाकों और टोंक रोड तक साफ तौर पर देखा गया।
  • अपुष्ट हताहत आंकड़े: मौके पर मौजूद चश्मदीदों और स्थानीय सूत्रों से मिल रही शुरुआती अप्रामाणिक जानकारियों के अनुसार, मलबे और आग की सीधी चपेट में आने से 3 श्रमिकों की मृत्यु होने की दर्दनाक सूचना मिल रही है। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट द्वारा इस सांख्यिकीय आंकड़े की कोई भी आधिकारिक या कागजी पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस का रेस्क्यू ऑपरेशन; शॉर्ट सर्किट की आशंका

जयपुर कलेक्ट्रेट और पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारी स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर पल-पल की स्थिति पर विधिक नजर बनाए हुए हैं। खो नागोरियान थाना पुलिस के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा (Civil Defense) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के जवानों को गैस कटर, हाइड्रोलिक क्रेन और ऑक्सीजन सिलेंडरों जैसे जीवन रक्षक उपकरणों के साथ मलबे के भीतर सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए उतार दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का विधिक तौर पर कहना है कि हमारी पहली और एकमात्र प्राथमिकता मलबे या जहरीले कार्बन डाइऑक्साइड धुएं के बीच फंसे हर एक इंसान को सुरक्षित बाहर निकालना है। आग पर पूरी तरह विधिक नियंत्रण पाने और सर्च ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही हताहतों की वास्तविक संख्या और इस महा-हादसे के सटीक कारणों का पता चल पाएगा। हालांकि, प्राथमिक विधिक कयासों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह हादसा शॉर्ट सर्किट होने या फिर चिलचिलाती गर्मी के बीच बारूद के रखरखाव (Storage Guidelines) में बरती गई किसी घोर प्रशासनिक व विधिक लापरवाही की वजह से घटित हुआ हो सकता है।

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