जयपुर: घड़ी के डिब्बों में विदेश भेजे नपुंसकता रोकने वाले इंजेक्शंस; बड़े हॉस्पिटल का डॉक्टर भी शक के घेरे में

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नपुंसकता के इलाज के दावों के नाम पर अवैध इंजेक्शन का कारोबार जयपुर से ऑपरेट हो रहा था। जयपुर के एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर का असिस्टेंट इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। दावा है कि डॉक्टर से फॉर्मूला सीखकर उसने ये अवैध इंजेक्शन तैयार किया था और इसे विदेशों में घड़ी के डिब्बों में पैक करके सप्लाई कर रहा था।

भास्कर पड़ताल: DCGI से अप्रूव नहीं है इंजेक्शन

जांच में सामने आया है कि ‘TRIMIX’ नाम का ऐसा कोई भी इंजेक्शन ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अप्रूव नहीं है। इस अवैध कारोबार का खुलासा तब हुआ जब गुजरात ड्रग्स डिपार्टमेंट को सूरत में एक फार्मा कंपनी के रूटीन इंस्पेक्शन के दौरान इस इंजेक्शन के बारे में पता चला। इसके बाद जांच की कड़ियां जयपुर के भंडारी हॉस्पिटल तक जा पहुंचीं। 9 अप्रैल को राजस्थान के ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम ने जब छापा मारा तो इस काले कारोबार की पूरी परतें खुल गईं।

सूरत से जयपुर तक ऐसे हुआ खुलासा

सूरत में क्यूरीमेड लाइफ साइंसेज (Curimed Life Sciences) में ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी। वहां ‘TRIMIX’ इंजेक्शन मिला, जिसका बिल ‘Oh man’ फार्मेसी के नाम से कटा हुआ था। बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर जयपुर के डॉ. चिराग भंडारी का मिला। जांच में पता चला कि ‘Oh man’ नाम से कोई भी रजिस्टर्ड फार्मेसी नहीं है। ऑनलाइन सर्च करने पर ‘ओह मैन’ नाम की एक वेबसाइट मिली, जो सेक्सुअल डिसऑर्डर के मरीजों को टेली-कंसल्टेंसी देती है और इसका संबंध भंडारी अस्पताल में स्थित जयभवानी फार्मेसी से पाया गया।

जयभवानी फार्मेसी पर छापा और डॉक्टर का बयान

सेंट्रल टीम और राजस्थान ड्रग्स डिपार्टमेंट ने जयभवानी फार्मेसी पर छापा मारा। हालांकि, रेड के दौरान वहां इंजेक्शन नहीं मिला, लेकिन डॉ. चिराग भंडारी से पूछताछ में कई राज खुले। डॉ. चिराग ने बताया कि वे तीन अलग-अलग दवाओं को मिक्स करके एक इंजेक्शन तैयार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका पूर्व असिस्टेंट मनीष सोनी, जो पिछले पांच साल से उनके यहाँ था, गड़बड़ी कर रहा था। डॉक्टर के अनुसार, मनीष को दवाओं के मिश्रण का अनुपात पता था और उसने बिना अनुमति के इंजेक्शन बनाकर बेचे और ‘Oh man’ प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया।

विदेशों में तस्करी और भारी वसूली\

मनीष सोनी पर आरोप है कि उसने युगांडा, सऊदी अरब और कोरिया समेत कई देशों में कोरियर के जरिए ये इंजेक्शन भेजे। गुवाहाटी के मेडिकल कॉलेज, असम के इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी से लेकर नागपुर, सूरत, अहमदाबाद और हरियाणा तक यह अवैध सप्लाई की गई। विदेशी मरीजों से एक-एक इंजेक्शन के 800 से लेकर 1600 डॉलर तक वसूले गए। एक्सपर्ट्स के अनुसार, तीन दवाओं का यह अनधिकृत मिश्रण मरीजों के लिए जानलेवा और नुकसानदायक हो सकता है।

अस्पताल प्रशासन की सफाई और FIR

भंडारी अस्पताल के एमडी डॉ. कांतिमल भंडारी ने कहा कि इस प्रकार दवाई देना लीगल है और डॉ. चिराग भंडारी के पास इसकी फेलोशिप है। उन्होंने बताया कि असिस्टेंट मनीष सोनी ने 400-500 मरीजों से अपने व्यक्तिगत खाते में पैसे मंगवाए और करीब 80-90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। अस्पताल ने 2 अप्रैल को ही मनीष सोनी के खिलाफ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी थी। आरोपी पकड़े जाने के डर से इंजेक्शनों को अलार्म घड़ी के डिब्बों में छिपाकर भेजता था।

विवादों से पुराना नाता

जांच में डॉ. चिराग भंडारी का पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया है। वे करीब 7 साल पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह केस अब खत्म हो चुका है। वर्तमान मामले में अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि ‘ट्राइमिक्स’ इंजेक्शन आधिकारिक रूप से वहां न तो खरीदा जाता है और न ही बेचा जाता है।

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