राजस्थान की राजधानी जयपुर में संचालित अन्नपूर्णा रसोइयों की व्यवस्था को लेकर गुरुवार को प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। जिला कलक्टर संदेश नायक के नेतृत्व में 83 अधिकारियों की एक विशाल टीम ने पूरे शहर में फैली 83 रसोइयों का एक साथ औचक निरीक्षण किया। इस बड़ी कार्रवाई से पूरे शहर के राशन संचालकों और संबंधित संस्थाओं में हड़कंप मच गया।
27 बिंदुओं पर सघन जांच
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्धारित 27 बिंदुओं पर व्यवस्थाओं को परखा। इसमें मुख्य रूप से भोजन का मेन्यू, चपातियों का वजन और उनकी गुणवत्ता, खाना गर्म परोसा जा रहा है या नहीं, कर्मचारियों की यूनिफॉर्म, परिसर की साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, बर्तन धोने की व्यवस्था और आधिकारिक रजिस्टर में की गई एंट्रीज जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की गई।
दो रसोइयों में मिलीं गंभीर कमियां
प्रशासन द्वारा की गई इस जांच में दो रसोइयों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। यहाँ साफ-सफाई का घोर अभाव था, भोजन की गुणवत्ता तय मेन्यू के अनुसार नहीं थी और पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। इसके अलावा, निरीक्षण रजिस्टर, ऑफलाइन प्रमाणित रजिस्टर, हाथ धोने के साबुन, रसोई संख्या और भोजन विवरण वाले बोर्ड के साथ-साथ कूड़ेदान (डस्टबिन) जैसी बुनियादी चीजों की भी कमी पाई गई।
ये गंभीर कमियां निम्नलिखित केंद्रों पर मिलीं:
- रसोई संख्या 515: (टचस्टोन फाउंडेशन, वीटी रोड मानसरोवर)
- रसोई संख्या 1354: (सुजस सांस्कृतिक सेवा संस्थान)
जुर्माना और सख्त निर्देश
जिला कलक्टर ने इन कमियों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नगर निगम को निर्देश दिए कि दोनों दोषी रसोइयों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खुद राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर स्थित रसोई का जायजा लिया और मौके पर ही सुधार के कड़े निर्देश दिए। इस अभियान में अतिरिक्त जिला कलक्टरों और नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों ने मानसरोवर, सांगानेर, मालवीय नगर, लालकोठी, टोंक रोड और सीकर रोड जैसे प्रमुख इलाकों में जांच की।