जयपुर। भारतीय सिनेमा में लीक से हटकर बनी और देश के आर्थिक इतिहास के पन्नों को खंगालती बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘गवर्नर’ आज देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। रिलीज़ से ठीक एक दिन पहले, गुरुवार शाम को जयपुर में मीडिया प्रतिनिधियों, सिनेमा प्रेमियों और विशेष अतिथियों के लिए इस फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। फिल्म की दमदार विषयवस्तु, सधे हुए अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
क्या है फिल्म की कहानी?
यह फिल्म दर्शकों को सीधे साल 1990 के उस दौर में ले जाती है, जब भारत गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा था और देश दिवालिया होने की कगार पर खड़ा था। आसमान छूती महंगाई, ईंधन (फ्यूल) की भारी किल्लत, राजनीतिक अस्थिरता और आम जनता के बीच फैलती घबराहट के माहौल के बीच एक ऐसे नौकरशाह (Bureaucrat) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, जो इस पद को लेने का इच्छुक नहीं था। इसके बाद देश को इस ऐतिहासिक तबाही से बाहर निकालने के लिए उसका संघर्ष और कठिन फैसले कहानी को बेहद रोचक और भावनात्मक बना देते हैं।
मनोज बाजपेयी का एक और मास्टरक्लास अभिनय
फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे मनोज बाजपेयी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अभिनय के असली बादशाह क्यों हैं।
- उनका अभिनय बेहद शांत, संयमित और गरिमापूर्ण है।
- बिना भारी-भरकम संवादों के भी वे केवल अपने चेहरे के भावों और बेहतरीन ‘स्क्रीन प्रेजेंस’ से देश के गवर्नर पर मौजूद मानसिक दबाव को दर्शकों तक हूबहू पहुँचाने में सफल रहे हैं।
सह-कलाकारों का मिला मजबूत साथ: > फिल्म में अदा शर्मा ने एक खोजी और युवा पत्रकार की भूमिका निभाई है, जिसकी एक ब्रेकिंग न्यूज़ देश के भविष्य को बदल सकती है। वहीं, जानी-मानी अभिनेत्री मधु ने गवर्नर की पत्नी का एक बेहद संवेदनशील किरदार निभाया है, जो अपने पति के संघर्षों में खामोशी से उनका संबल बनती हैं।
निर्देशन और लेखन की बारीकियां
मराठी सिनेमा और थिएटर के दिग्गज निर्देशक चिन्मय मांडलेकर इस फिल्म के लिए विशेष प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने 90 के दशक के वातावरण, दफ्तरों की बनावट और उस दौर की बेचैनी को पर्दे पर बेहद वास्तविक रूप में ढाला है। लेखक शुभेंदु भट्टाचार्य, रवि असरानी और सौरभ भारत ने अर्थशास्त्र और फाइनेंस जैसे जटिल व गंभीर विषय को भी मानवीय भावनाओं से जोड़कर आम दर्शकों के लिए बेहद आसान और दिलचस्प बना दिया है, जिससे फिल्म कहीं भी उबाऊ नहीं लगती।
क्यों देखनी चाहिए ‘गवर्नर’?
‘गवर्नर’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सिर्फ इतिहास की जानकारी नहीं देती, बल्कि दर्शकों को प्रेरित करती है। आज की युवा पीढ़ी भारतीय इतिहास के इस नाजुक मोड़ के बारे में बहुत कम जानती है। यह फिल्म बखूबी दर्शाती है कि देश की अर्थव्यवस्था सिर्फ कागजी आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन और देश की संप्रभुता से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
शानदार बैकग्राउंड स्कोर, सटीक सिनेमेटोग्राफी और ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ जैसे नए जॉनर के साथ आई ‘गवर्नर’ इस साल की सबसे प्रभावशाली और प्रेरणादायक फिल्म है। ओटीटी (OTT) के इस दौर में भी यह एक ऐसी फिल्म है, जिसका असली रोमांच बड़े पर्दे पर ही महसूस किया जा सकता है। इसे देखने के लिए अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख जरूर करें।